इंद्रजीत सिंह छोटू को जान से मारने की धमकी मामले में फैसला: दो दोषियों को 1-1 वर्ष की जेल : रजिस्टर्ड डाक से भेजी गई थी धमकी भरी चिट्ठी, दुर्ग कोर्ट ने सुनाई सजा; जुर्माना नहीं भरने पर 10 दिन अतिरिक्त कारावास

 इंद्रजीत सिंह छोटू को जान से मारने की धमकी मामले में फैसला: दो दोषियों को 1-1 वर्ष की जेल : रजिस्टर्ड डाक से भेजी गई थी धमकी भरी चिट्ठी, दुर्ग कोर्ट ने सुनाई सजा; जुर्माना नहीं भरने पर 10 दिन अतिरिक्त कारावास

भिलाई। शहर के प्रतिष्ठित व्यवसायी एवं सर्व समाज कल्याण समिति के अध्यक्ष इंद्रजीत सिंह छोटू को जान से मारने की धमकी देने के बहुचर्चित मामले में दुर्ग न्यायालय ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। न्यायालय ने मामले में आरोपी राजेश कुमार गुप्ता और सतबीर सिंह उर्फ सोनू को दोषी ठहराते हुए प्रत्येक को एक वर्ष के साधारण कारावास तथा ₹500 अर्थदंड की सजा सुनाई है। अर्थदंड की राशि जमा नहीं करने पर 10 दिन का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा।

रजिस्टर्ड डाक से मिली थी धमकी

प्रकरण के अनुसार, कुछ वर्ष पूर्व 3 जनवरी को हथखोज स्थित इंद्रजीत सिंह छोटू की हैवी ट्रांसपोर्ट कंपनी के कार्यालय में रजिस्टर्ड डाक के माध्यम से एक सफेद लिफाफा प्राप्त हुआ था। लिफाफे में एक धमकी भरा पत्र था, जिसमें उन्हें गंभीर परिणाम भुगतने और जान से मारने की चेतावनी दी गई थी।

पत्र में लिखा गया था कि उनके पीछे लोगों को लगाया गया है और उन्हें नुकसान पहुंचाने के लिए बाहरी व्यक्तियों को बुलाया गया है। पत्र प्राप्त होने के बाद इंद्रजीत सिंह छोटू ने तत्काल भिलाई-3 थाना पहुंचकर शिकायत दर्ज कराई थी।

पुलिस जांच में सामने आए आरोपी

शिकायत के आधार पर पुलिस ने भारतीय दंड संहिता की धारा 506 एवं 507 के तहत अज्ञात आरोपियों के विरुद्ध अपराध दर्ज कर जांच शुरू की। जांच के दौरान पता चला कि धमकी भरा पत्र सेक्टर-2 स्थित डाकघर से भेजा गया था। पुलिस ने साक्ष्यों के आधार पर राजेश कुमार गुप्ता और सतबीर सिंह उर्फ सोनू को मामले में आरोपी बनाया।

कोर्ट ने माना गंभीर अपराध

सजा के बिंदु पर सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष ने आरोपियों के प्रथम अपराधी होने का हवाला देते हुए परिवीक्षा अथवा केवल अर्थदंड देने का आग्रह किया। वहीं अभियोजन पक्ष ने अपराध की प्रकृति को गंभीर बताते हुए कठोर दंड की मांग की।

दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद न्यायालय ने कहा कि धारा 507 के तहत गुमनाम तरीके से धमकी देना गंभीर अपराध है, जिसके लिए दो वर्ष तक के कारावास का प्रावधान है। मामले की गंभीरता तथा लंबे समय तक चले न्यायिक परीक्षण को ध्यान में रखते हुए अदालत ने दोनों आरोपियों को दोषी करार दिया।

यह सुनाई गई सजा

न्यायालय ने दोनों आरोपियों को—

  • धारा 506 आईपीसी के तहत 6 माह का साधारण कारावास एवं ₹500 अर्थदंड।
  • धारा 507 आईपीसी के तहत 6 माह का साधारण कारावास।

दोनों सजाएं मिलाकर प्रत्येक आरोपी को कुल 1 वर्ष का साधारण कारावास भुगतना होगा। साथ ही अर्थदंड जमा नहीं करने पर 10 दिन का अतिरिक्त कारावास भी भुगतना पड़ेगा। न्यायालय ने सजा वारंट जारी कर आरोपियों को केंद्रीय जेल दुर्ग भेजने के निर्देश दिए हैं।

महत्वपूर्ण साक्ष्यों को सुरक्षित रखने का आदेश

मामले में प्रस्तुत सफेद लिफाफा, धमकी भरा पत्र, डाक संबंधी अभिलेख, हस्तलिपि नमूने तथा एक सीडी कैसेट को न्यायालय ने महत्वपूर्ण साक्ष्य मानते हुए अभिलेख के साथ सुरक्षित रखने का आदेश दिया है। साथ ही धारा 437(ए) के तहत आरोपियों के जमानत बंधपत्रों को निर्णय की तिथि से छह माह तक प्रभावशील बनाए रखने के निर्देश दिए गए हैं।

फैसले से व्यापारिक जगत में संतोष

न्यायालय के इस फैसले को लेकर शहर के व्यापारिक एवं सामाजिक संगठनों में संतोष का माहौल है। फैसले पर प्रतिक्रिया देते हुए इंद्रजीत सिंह छोटू ने कहा कि कानून सबके लिए समान है और किसी भी व्यक्ति को धमकी देकर डराने या दबाव बनाने का प्रयास स्वीकार नहीं किया जा सकता।