भिलाई में दो मासूम बहनों से दुष्कर्म का मामला, नाबालिग पड़ोसी बालक को भेजा गया बाल सुधार गृह
भिलाई। छावनी थाना क्षेत्र में दो नाबालिग सगी बहनों के साथ दुष्कर्म का गंभीर मामला सामने आया है। घटना के बाद क्षेत्र में आक्रोश का माहौल है। पुलिस ने मामले में 17 वर्षीय अपचारी बालक को हिरासत में लेकर विधिक कार्रवाई करते हुए बाल सुधार गृह भेज दिया है।
छोटी बच्ची की तबीयत बिगड़ने पर हुआ खुलासा
पुलिस के अनुसार घटना का खुलासा तब हुआ जब परिवार की छोटी बच्ची को पेट और निजी अंगों में दर्द की शिकायत होने लगी। परिजनों द्वारा पूछताछ किए जाने पर बच्ची ने अपने साथ हुई घटना की जानकारी दी।
इसके बाद बड़ी बहन ने भी परिवार को बताया कि कुछ माह पूर्व उसके साथ भी आरोपी द्वारा इसी प्रकार की वारदात की गई थी। दोनों बच्चियों की बात सामने आने के बाद परिवार ने तत्काल पुलिस से संपर्क किया।
पड़ोसी होने का आरोपी ने उठाया फायदा
प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि आरोपी और पीड़ित परिवार एक-दूसरे के पड़ोसी हैं। दोनों परिवारों के बीच सामान्य पारिवारिक संबंध थे और बच्चों का एक-दूसरे के घर आना-जाना लगा रहता था। इसी विश्वास का फायदा उठाकर आरोपी ने कथित तौर पर वारदात को अंजाम दिया।
पुलिस ने शिकायत प्राप्त होने के बाद मामले की गंभीरता को देखते हुए अलग-अलग अपराध दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
पुलिस ने की त्वरित कार्रवाई
अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक सुखनंदन राठौर ने बताया कि पीड़ित पक्ष की शिकायत के आधार पर दो अलग-अलग प्रकरण दर्ज किए गए हैं। आरोपी अपचारी बालक को हिरासत में लेकर पूछताछ की गई, जिसके बाद उसे न्यायिक प्रक्रिया के तहत बाल सुधार गृह भेज दिया गया।
छावनी सीएसपी प्रशांत पैकरा ने बताया कि मामले की विस्तृत जांच जारी है तथा सभी आवश्यक कानूनी प्रक्रियाओं का पालन किया जा रहा है।
परिजनों में आक्रोश, सख्त कार्रवाई की मांग
घटना के बाद पीड़ित परिवार में गहरा आक्रोश है। परिजनों ने आरोपी के खिलाफ कड़ी से कड़ी कार्रवाई की मांग की है। उनका कहना है कि मासूम बच्चों के साथ इस तरह के अपराध करने वालों को कठोर दंड मिलना चाहिए ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।
फिलहाल पुलिस मामले के सभी पहलुओं की जांच कर रही है और संबंधित कानूनी प्रावधानों के तहत आगे की कार्रवाई जारी है।
समाज के लिए संदेश : बच्चों की सुरक्षा हम सबकी सामूहिक जिम्मेदारी
यह घटना केवल एक परिवार की पीड़ा नहीं, बल्कि पूरे समाज के लिए गंभीर चेतावनी है। बच्चों के साथ होने वाले अपराध अक्सर परिचित लोगों, पड़ोसियों या करीबी व्यक्तियों द्वारा किए जाते हैं, इसलिए अभिभावकों को बच्चों की सुरक्षा को लेकर लगातार सजग रहने की आवश्यकता है।
माता-पिता और परिवार के सदस्य बच्चों के व्यवहार, मानसिक स्थिति और स्वास्थ्य में आने वाले अचानक बदलावों पर विशेष ध्यान दें। बच्चों के साथ खुलकर संवाद करें, उन्हें अच्छे और बुरे स्पर्श के बारे में जागरूक बनाएं तथा यह विश्वास दिलाएं कि किसी भी असहज घटना की जानकारी वे बिना डर के परिवार को दे सकते हैं।
समाज के प्रत्येक नागरिक की भी जिम्मेदारी है कि बच्चों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दें। यदि कहीं किसी बच्चे के साथ दुर्व्यवहार, शोषण या संदिग्ध गतिविधि की जानकारी मिले तो उसे नजरअंदाज करने के बजाय तत्काल पुलिस और संबंधित अधिकारियों को सूचित करें।
बच्चों का सुरक्षित बचपन ही एक स्वस्थ और सशक्त समाज की नींव है। इसलिए जागरूकता, सतर्कता और सामूहिक जिम्मेदारी के माध्यम से ही ऐसे अपराधों पर प्रभावी रोक लगाई जा सकती है।

