करोड़ों का स्टेडियम, कईयों AC गायब और अध्यक्ष को जानकारी नहीं! कुम्हारी नगर पालिका की कार्यप्रणाली पर उठे बड़े सवाल
खिलाड़ियों के लिए बनी सुविधाएं आखिर पहुंचीं कहां, एक साल तक किसी को खबर नहीं?
कुम्हारी नगर पालिका क्षेत्र में करोड़ों रुपये की लागत से निर्मित क्रिकेट स्टेडियम अब खेल गतिविधियों से ज्यादा प्रशासनिक लापरवाही और जवाबदेही के सवालों को लेकर चर्चा में है। स्टेडियम से लाभग एक दर्जन से ज्यादा एयर कंडीशनर (AC) गायब होने का मामला सामने आने के बाद नगर पालिका की कार्यप्रणाली पर गंभीर प्रश्नचिह्न लग गए हैं।
सूत्रों के अनुसार स्टेडियम में स्थापित AC को नगर पालिका के विभिन्न विभागों और कार्यालयों में लगाए जाने की चर्चा है। हालांकि इस संबंध में अभी तक कोई आधिकारिक दस्तावेज सार्वजनिक नहीं किया गया है, लेकिन मामला सामने आते ही स्थानीय जनप्रतिनिधियों और नागरिकों में नाराजगी देखने को मिल रही है।
करोड़ों की संपत्ति, लेकिन निगरानी शून्य?
सबसे हैरानी की बात यह है कि जिस स्टेडियम के निर्माण में करोड़ों रुपये खर्च किए गए, वहां से AC जैसी महत्वपूर्ण सुविधाएं लगभग एक वर्ष से गायब बताई जा रही हैं। इसके बावजूद नगर पालिका प्रशासन को इसकी जानकारी नहीं होना कई सवाल खड़े करता है।
यदि वास्तव में AC एक वर्ष पहले हटाई गई थीं, तो क्या किसी ने इसकी समीक्षा नहीं की? क्या किसी अधिकारी ने स्टेडियम का निरीक्षण नहीं किया? और यदि किया, तो फिर यह तथ्य सामने क्यों नहीं आया?
पार्षद ने उठाए सवाल, मांगी जवाबदेही
वार्ड पार्षद लता खैरवार ने इस पूरे मामले को गंभीर बताते हुए नगर पालिका प्रशासन से जवाब मांगा है। उनका कहना है कि जनता के धन से निर्मित संपत्तियों का उपयोग निर्धारित उद्देश्य के लिए होना चाहिए।
पार्षद का कहना है कि यदि स्टेडियम से AC हटाई गई हैं, तो इसकी आधिकारिक अनुमति किसने दी? क्या इस संबंध में कोई प्रशासनिक आदेश जारी किया गया था? यदि आदेश हुआ था तो इसकी जानकारी सार्वजनिक क्यों नहीं की गई?
नगर पालिका अध्यक्ष का जवाब बना चर्चा का विषय
जब इस पूरे मामले में नगर पालिका अध्यक्ष श्रीमती मीना वर्मा से जानकारी चाही गई, तो उन्होंने कहा कि उन्हें इस विषय में कोई जानकारी नहीं है।
अध्यक्ष का यह जवाब अब चर्चा का विषय बन गया है। सवाल यह उठ रहा है कि यदि करोड़ों रुपये की सार्वजनिक संपत्ति में लगी सुविधाएं एक वर्ष से गायब हैं और इसकी जानकारी नगर पालिका की सर्वोच्च निर्वाचित प्रतिनिधि को नहीं है, तो आखिर प्रशासनिक निगरानी किस स्तर पर हो रही है?
जनता के बीच यह सवाल तेजी से उठ रहा है कि क्या इतने गंभीर मामले में “जानकारी नहीं है” कह देना पर्याप्त जवाब माना जा सकता है, या फिर इसकी विस्तृत जांच और जवाबदेही तय की जानी चाहिए।
नेता प्रतिपक्ष का हमला: यह जनता के पैसे का दुरुपयोग
मामले को लेकर नगर पालिका की नेता प्रतिपक्ष श्रीमती जानकी ध्रुव ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि यह आम जनता के पैसे का सीधा-सीधा दुरुपयोग प्रतीत होता है।
जानकी ध्रुव के अनुसार क्रिकेट स्टेडियम का निर्माण युवाओं और खिलाड़ियों को बेहतर खेल सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए किया गया था। वहां स्थापित AC और अन्य संसाधन खिलाड़ियों की सुविधा के लिए थे, न कि उन्हें हटाकर अन्यत्र उपयोग करने के लिए।
उन्होंने कहा कि खिलाड़ियों के लिए उपलब्ध सुविधाओं को बढ़ाने और बेहतर बनाने के बजाय यदि पहले से मौजूद सुविधाओं को ही हटाया जा रहा है, तो यह पूरी तरह गलत है। इस मामले में जवाबदेही तय होनी चाहिए और दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जानी चाहिए।
स्टेडियम खिलाड़ियों का या कार्यालयों का?
स्थानीय लोगों का कहना है कि खेल सुविधाओं के नाम पर करोड़ों रुपये खर्च किए जाते हैं, लेकिन जब उन्हीं सुविधाओं को बचाने और बनाए रखने की बात आती है तो जिम्मेदार विभाग मौन दिखाई देते हैं।
यदि स्टेडियम से AC हटाकर नगर पालिका के अन्य कार्यालयों में लगाई गई हैं, तो यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि क्या खिलाड़ियों की जरूरतों से ज्यादा महत्वपूर्ण दफ्तरों की ठंडक हो गई है?
जवाबों से ज्यादा सवाल छोड़ गया पूरा मामला
यह मामला अब केवल AC के गायब होने तक सीमित नहीं रह गया है। यह नगर पालिका की निगरानी व्यवस्था, संपत्ति प्रबंधन और प्रशासनिक जवाबदेही की भी परीक्षा बन गया है।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि AC वास्तव में हटाई गई हैं, तो किसके आदेश पर हटाई गईं? उन्हें कहां लगाया गया? क्या इसकी कोई प्रशासनिक अनुमति थी? और यदि सब कुछ नियमों के तहत हुआ, तो इसकी जानकारी सार्वजनिक क्यों नहीं दी गई?
जब तक इन सवालों के स्पष्ट और दस्तावेजी जवाब सामने नहीं आते, तब तक करोड़ों की लागत से बने कुम्हारी क्रिकेट स्टेडियम पर उठ रहे सवाल थमने वाले नहीं हैं। जनता अब जवाब चाहती है—खिलाड़ियों की सुविधाएं आखिर गायब कैसे हुईं और इसके लिए जिम्मेदार कौन है?
(नोट: समाचार में उल्लिखित आरोप स्थानीय सूत्रों एवं जनप्रतिनिधियों द्वारा उठाए गए प्रश्नों पर आधारित हैं। आधिकारिक पक्ष प्राप्त होने पर उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।)

