मुख्यमंत्री साय ने गुरुजी कोर्सेवाड़ा को दी श्रद्धांजलि, अहिवारा कॉलेज का नामकरण उनके नाम पर करने की घोषणा
सीएम की मौजूदगी में श्रद्धांजलि सभा में अपेक्षा से कम जुटे लोग, दिसंबर में संभावित निगम चुनाव से पहले भाजपा संगठन की जमीनी सक्रियता पर उठे सवाल
भिलाई-3। अहिवारा के दिवंगत विधायक डोमन लाल कोर्सेवाड़ा यानी ‘गुरुजी’ को श्रद्धांजलि देने पहुंचे मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने उनके सामाजिक और राजनीतिक योगदान को याद करते हुए अहिवारा स्थित शासकीय महाविद्यालय का नामकरण उनके नाम पर करने की महत्वपूर्ण घोषणा की। मुख्यमंत्री ने कहा कि गुरुजी कोर्सेवाड़ा का निधन छत्तीसगढ़ के लिए अपूरणीय क्षति है। समाज, प्रदेश और विशेषकर अनुसूचित जाति के उत्थान के लिए उनके द्वारा किए गए कार्य हमेशा याद रखे जाएंगे।
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- मुख्यमंत्री साय ने गुरुजी कोर्सेवाड़ा को दी श्रद्धांजलि, अहिवारा कॉलेज का नामकरण उनके नाम पर करने की घोषणा
- सीएम की मौजूदगी में श्रद्धांजलि सभा में अपेक्षा से कम जुटे लोग, दिसंबर में संभावित निगम चुनाव से पहले भाजपा संगठन की जमीनी सक्रियता पर उठे सवाल
- कॉलेज का नामकरण गुरुजी के नाम पर करने की घोषणा
- मंत्री, सांसद और विधायकों ने भी किया स्मरण
- श्रद्धांजलि सभा में कम भीड़ ने बढ़ाई भाजपा की चिंता, चुनाव से पहले संगठन की सक्रियता पर सवाल
- क्या चुनाव से पहले भाजपा को करना होगा आत्ममंथन?
गुरुवार को दुर्ग जिले के भिलाई-3 स्थित स्वामी आत्मानंद शासकीय विद्यालय में आयोजित श्रद्धांजलि सभा में मुख्यमंत्री साय ने स्वर्गीय डोमन लाल कोर्सेवाड़ा के छायाचित्र पर पुष्पांजलि अर्पित कर उन्हें नमन किया। इस दौरान उन्होंने कहा कि गुरुजी अपने सरल स्वभाव, मृदुभाषी व्यक्तित्व और समाज के प्रति समर्पण के कारण अलग पहचान रखते थे। क्षेत्र में लोग उन्हें उनके वास्तविक नाम से अधिक गुरुजी के नाम से जानते थे।
मुख्यमंत्री ने उनके साथ जुड़े आत्मीय प्रसंग को साझा करते हुए बताया कि जब स्वर्गीय कोर्सेवाड़ा हैदराबाद में उपचार के लिए भर्ती थे, तब उन्होंने स्वयं फोन कर उनका हालचाल जाना था। इतना ही नहीं, उन्होंने प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री को भी हैदराबाद जाकर उनका हाल जानने के निर्देश दिए थे। मुख्यमंत्री ने कहा कि अनुसूचित जाति के विकास, सामाजिक सशक्तिकरण और क्षेत्र की उन्नति के लिए गुरुजी का योगदान आने वाली पीढ़ियों को प्रेरित करता रहेगा।
कॉलेज का नामकरण गुरुजी के नाम पर करने की घोषणा
श्रद्धांजलि सभा में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने अहिवारा स्थित शासकीय महाविद्यालय का नामकरण स्वर्गीय डोमन लाल कोर्सेवाड़ा के नाम पर करने की घोषणा की। इसे दिवंगत विधायक के सामाजिक और राजनीतिक योगदान के प्रति सम्मान के रूप में देखा जा रहा है। मुख्यमंत्री की इस घोषणा से उनके समर्थकों और क्षेत्रवासियों के बीच उनके योगदान को स्थायी पहचान मिलने की उम्मीद जगी है।
मंत्री, सांसद और विधायकों ने भी किया स्मरण
कार्यक्रम में स्कूल शिक्षा, ग्रामोद्योग एवं विधि मंत्री गजेंद्र यादव, कौशल विकास एवं अनुसूचित जाति विकास मंत्री गुरु खुशवंत साहेब, रायपुर सांसद बृजमोहन अग्रवाल तथा जगदलपुर विधायक किरण देव ने भी सभा को संबोधित किया। सभी जनप्रतिनिधियों ने स्वर्गीय कोर्सेवाड़ा के व्यक्तित्व, राजनीतिक जीवन और समाज के प्रति उनके समर्पण को याद करते हुए श्रद्धांजलि अर्पित की।
इस अवसर पर दुर्ग ग्रामीण विधायक ललित चंद्राकर, जनपद पंचायत पाटन की अध्यक्ष कीर्ति नायक, कलेक्टर अभिजीत सिंह, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक विजय अग्रवाल सहित अनेक अधिकारी, जनप्रतिनिधि और विभिन्न क्षेत्रों से पहुंचे नागरिक मौजूद रहे।
श्रद्धांजलि सभा में कम भीड़ ने बढ़ाई भाजपा की चिंता, चुनाव से पहले संगठन की सक्रियता पर सवाल
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय, प्रदेश के वरिष्ठ मंत्रियों, सांसद और विधायकों की मौजूदगी में आयोजित इस महत्वपूर्ण कार्यक्रम में अपेक्षाकृत कम संख्या में लोगों की उपस्थिति राजनीतिक चर्चा का विषय बन गई। जिस दिवंगत विधायक ने अहिवारा क्षेत्र में अपनी अलग पहचान बनाई और जिनके प्रति श्रद्धांजलि देने के लिए प्रदेश के मुख्यमंत्री स्वयं पहुंचे, उस कार्यक्रम में अपेक्षित जनभागीदारी नजर नहीं आने से स्थानीय राजनीतिक समीकरणों को लेकर भी चर्चाएं शुरू हो गई हैं।
इस पूरे घटनाक्रम को इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि दिसंबर माह में भिलाई-चरोदा नगर निगम के चुनाव संभावित बताए जा रहे हैं। ऐसे समय में मुख्यमंत्री के कार्यक्रम में स्थानीय स्तर पर अपेक्षित भीड़ नहीं जुट पाना भाजपा संगठन की तैयारियों, कार्यकर्ताओं के आपसी समन्वय और जमीनी सक्रियता पर सवाल खड़े करता है।
स्थानीय भाजपा के कुछ पुराने पदाधिकारियों ने भी कार्यक्रम में कम उपस्थिति को लेकर चिंता जाहिर की। उनका मानना है कि मुख्यमंत्री जैसे शीर्ष नेतृत्व की मौजूदगी वाले कार्यक्रम में कार्यकर्ताओं और आम नागरिकों की भागीदारी कहीं अधिक होनी चाहिए थी। आखिर स्थानीय संगठन की ओर से ऐसा क्या प्रयास किया गया कि कार्यक्रम में अपेक्षित जनसमर्थन दिखाई नहीं दिया?
राजनीतिक हलकों में इसे स्थानीय संगठन की निष्क्रियता और कुछ पदाधिकारियों के ओवरकॉन्फिडेंस से जोड़कर भी देखा जा रहा है। हालांकि, कम उपस्थिति के वास्तविक कारणों को लेकर कोई आधिकारिक स्थिति सामने नहीं आई है, लेकिन स्थानीय स्तर पर उठ रही चर्चाओं ने संगठन के भीतर की कार्यप्रणाली पर बहस जरूर छेड़ दी है।
क्या चुनाव से पहले भाजपा को करना होगा आत्ममंथन?
भिलाई-चरोदा नगर निगम चुनाव की संभावित आहट के बीच यह कार्यक्रम भाजपा के स्थानीय संगठन के लिए एक तरह का संकेत भी माना जा रहा है। चुनाव केवल बड़े नेताओं की मौजूदगी और मंचीय कार्यक्रमों से नहीं जीते जाते, बल्कि इसके लिए बूथ स्तर तक कार्यकर्ताओं की सक्रियता, आपसी तालमेल और जनता से सीधा जुड़ाव जरूरी होता है।
मुख्यमंत्री की मौजूदगी में आयोजित श्रद्धांजलि सभा में कम जनभागीदारी ने यह सवाल जरूर खड़ा कर दिया है कि क्या भिलाई-चरोदा में भाजपा का स्थानीय संगठन चुनावी चुनौती के लिए पूरी तरह तैयार है? या फिर संगठन के कुछ पदाधिकारी जमीनी हकीकत का आकलन किए बिना ही अपनी तैयारियों को पर्याप्त मान रहे हैं?
एक ओर मुख्यमंत्री की ओर से गुरुजी कोर्सेवाड़ा के नाम पर महाविद्यालय का नामकरण करने की घोषणा दिवंगत विधायक के प्रति सम्मान का बड़ा संदेश है, तो दूसरी ओर उसी कार्यक्रम में अपेक्षा से कम उपस्थिति स्थानीय भाजपा संगठन के लिए आत्ममंथन का विषय बन गई है। अब देखना होगा कि आगामी नगर निगम चुनाव से पहले संगठन इस संकेत को कितनी गंभीरता से लेता है।





