ओशो– जो आदमी अपना शत्रु है, वही आदमी अधार्मिक है। और जो अपना शत्रु है, वह किसी का मित्र तो कैसे हो सकेगा? जो अपना भी मित्र नहीं, वह किसका मित्र हो सकेगा! जो अपने लिए ही दुख के आधार बना रहा है, वह सबके लिए दुख के आधार बना देगा।पहला पाप अपने साथ शत्रुता […]Read More
धर्म यानी ध्यान, ध्यान में तुम हिंदू, मुसलमान, ईसाई भी
ओशो- धर्म यानी ध्यान। ध्यान में तुम हिंदू नहीं रह जाओगे, मुसलमान भी नहीं रह जाओगे, ईसाई भी नहीं रह जाओगे। क्योंकि ध्यान का अर्थ है अपने विचारों से मुक्त हो जाना; अपने विचारों का साक्षी हूं मैं, ऐसा जान लेना। तब तुम देखोगे कि हिंदुओं के विचार, मुसलमानों के विचार, ईसाइयों के विचार तुम्हारे […]Read More
FIR पर लगी रोक, पुरानी भिलाई थाना प्रभारी महेश ध्रुव
भिलाई/ खूबचंद बघेल शासकीय कॉलेज के असिस्टेंट प्रोफेसर विनोद शर्मा पर जानलेवा हमले का आरोपी प्रोबीर शर्मा की पत्नी पूर्णिमा शर्मा के पक्ष में न्यायालय ने आदेश देते हुए पुरानी भिलाई थाना प्रभारी महेश ध्रुव और महिला थाना प्रभारी श्रद्धा पाठक के खिलाफ FIR दर्ज करने का आदेश दिया था। भिलाई-3 न्यायालय ने धारा 127BNS […]Read More
26 फरवरी को निकलेगी सेंट्रल इंडिया की सबसे बड़ी बारात,
26 को ढलती शाम से सुहानी रात तक होंगे कई आयोजन भिलाई/ इंतजार की घड़ी खत्म होने वाली है। कुछ घंटें ही शेष है बाबा की बारात में शामिल होने के लिए। तैयारी जोरों से चल रही है। 26 फरवरी की शाम से लेकर रात तक आयोजन होंगे। बोल बम सेवा एवं कल्याण समिति के […]Read More
ओशो– ध्यान रखना: पुण्य भी समाप्त हो जाते हैं! पुण्यों की भी सीमा है। कमाते ही रहोगे, तो ही साथ रहेंगे। बहती ही रहे पुण्य की धारा, तो ही ठीक है। रुकी–कि गयी। ऐसा ही समझो कि जैसे तुम आग जलाते हो। ईंधन झोंकते रहो, तो आग जलती रहेगी, जलती रहेगी। ईंधन बंद हो गया, […]Read More
ओशो- मैं सुख का विरोधी नहीं हूं। मैं तुमसे यह नहीं कह रहा हूं कि तुम सब बांटकर और दुखी हो जाओ। मैं तुमसे यह भी नहीं कह रहा हूं कि तुम जाकर फकीर हो जाओ। मैं तुमसे यह भी नहीं कह रहा हूं कि तुम दीन-हीन होकर भटकने लगो। मैं तुमसे यही कह रहा […]Read More
अगर हिंदुस्तान में युवकों के भीतर पैदा होते अनुशासनहीनता और
ओशो- एक और प्रश्न इसी संदर्भ में पूछा है कि युवकों में, सारे मुल्क में विद्यार्थियों में विरोध है, आंदोलन है, अनुशासन टूट रहा है। क्या उसके लिए कहूं? तो इसी संदर्भ में यह कहना चाहता हूं कि यह विद्रोह शुभ है। यह आंदोलन बुरा नहीं है, यह अच्छे लक्षण हैं। हालांकि अभी जो उसने […]Read More
“जैसे जल से लहरें उठती है और अग्नि से लपटें, वैसे ही सर्वव्यापक हम से लहराता है।‘’ ओशो- पहले तो यह समझने की कोशिश करो लहर क्या है, और तब तुम समझ सकते हो कि कैसे यह चेतना की लहर तुम्हें ध्यान में ले जाने में सहयोगी हो सकती है। तुम सागर में उठती लहरों […]Read More
प्रश्नः ओशो, मैं चारों ओर ऐसे लोग देख रही हूं जो आनंदित हैं। यह सुंदर बात है। लेकिन मैं अपने आप से पूछती हूं कि इनमें से कितने युवक-युवतियां अपने माता-पिताओं को घर पर संताप में छोड़ आए हैं? क्या यह उचित है कि वे केवल अपनी ही फिक्र करें और दूसरे दायित्वों को भूल […]Read More
ओशो- अगर हम एक ऐसे आदमी की कल्पना करें, जिसके पास बड़ा महल है, लेकिन सामान इतना है कि भीतर जाने का उपाय नहीं है। तो वो बाहर बरामदे में ही निवास करता है। हम सब भी वैसे ही आदमी हैं। मन तो इतना भरा है कि वहां आत्मा के रहने की जगह नहीं हो […]Read More