ओशो- अगर स्वयं को न जान पाये, और सब भी जान लिया तो वह सारा ज्ञान भी इकट्ठे जोड़ में अज्ञान सिद्ध होगा। अगर अपने को न देख पाये, और सारा जगत देख डाला, चांद—तारे छान डाले, तो भी तुम अन्य ही रहोगे। क्योंकि आख तो उसी को मिलती है, जो स्वयं को देख लेता […]Read More
जो शिक्षा तुम्हारे भीतर वैयक्तिकता विकसित नहीं करती वह शिक्षा
ओशो– मैं एक ऐसी शिक्षा प्रणाली चाहूंगा, जो तुम्हें उत्तर ने दे बल्कि तुम्हारे प्रश्न अधिक तीव्र करे, तुम्हारी बुद्धि अधिक पैनी करे और तुम्हें एक अखंडता प्रदान करे।-ओशो मैंने सुना है, प्रथम विश्वयुद्ध के बाद मनोवैज्ञानिक ने पहली बार आदमी की बुद्धि नापने की कोशिश की। इस काम के लिए सेना बहुत अच्छी जगह […]Read More
आत्मज्ञान के पहले कोई व्यक्ति परोपकारी नहीं हो सकता “ओशो”
ओशो– एक सम्राट बूढ़ा हुआ। उसके तीन बेटे थे और वह बड़ी चिंता में था कि किसको राज्य दें। तीनों ही योग्य और कुशल थे, तीनों ही समान गुणधर्मा थे। इसलिए बड़ी कठिनाई हुई। उसने एक दिन तीनों बेटों को बुलाया और कहा कि पिछले पूरे वर्ष में तुमने जो भी कृत्य महानतम किया हो— […]Read More
ओशो– विज्ञान भैरव तंत्र का जगत बौद्धिक नहीं है। वह दार्शनिक भी नहीं है। तंत्र शब्द का अर्थ है – विधि, उपाय, मार्ग। इसलिए यह एक वैज्ञानिक ग्रंथ है। विज्ञान ‘’क्यों‘’ की नहीं, ‘’कैसे’’ की फिक्र करता है। दर्शन और विज्ञान में यही बुनियादी भेद है। दर्शन पूछता है – यह अस्तित्व क्यों है? विज्ञान […]Read More
ध्यान की सक्रिय-विधियां क्यों? क्यूंकि मस्तिष्क के कारण हृदय दमित
ओशो- आधुनिक मनुष्य एक बहुत ही नयी घटना है। कोई भी परंपरागत विधि अपने वर्तमान रूप में प्रयुक्त नहीं हो सकती क्योंकि आधुनिक मनुष्य पहले कभी था ही नहीं, अत: सभी पुरातन विधियां अब असंगत हो गयी हैं।उदाहरण के तौर पर, शरीर इतना बदल गया है, इतना व्यसनी हो चुका है कि कोई विधि सहायक […]Read More
ओशो- लोग मुझसे पूछते हैं कोई मंत्र दे दें मैं उनसे कहता हूं मंत्र वगैरह न लें। एक मंत्र परमात्मा ने दिया है, वह ‘श्वास’ है। उसको देखें। श्वास पहला मंत्र है। बच्चा पैदा होते ही पहला काम करता है श्वास लेने का और आदमी जब मरता है तो आखिरी काम करता है श्वास छोड़ने […]Read More
ओशो- शिवलिंग से ज्यादा महत्वपूर्ण प्रतिमा पृथ्वी पर कभी नहीं खोजी गई। उसमें आपकी आत्मा का पूरा आकार छिपा है। और आपकी आत्मा की ऊर्जा एक वर्तुल में घूम सकती है, यह भी छिपा है। और जिस दिन आपकी ऊर्जा आपके ही भीतर घूमती है और आप में ही लीन हो जाती है, उस दिन […]Read More
हे शिव, आपका सत्य क्या है? ओशो- हमने कैलाश पर शिव का आवास बनाया है। वह प्रतीक है कि कैलाश सबसे ऊंचा शिखर है, सबसे पवित्र शिखर है। वहीं हमने शिव का आवास रखा है। हम वहां जा सकते हैं, लेकिन हमें वहा से नीचे उतर आना होगा। वह हमारा आवास नहीं हो सकता है। […]Read More
भिलाई-3/ ओशो सक्रिय ध्यान एक बार फिर से इस वर्ष एक से इक्कीस मार्च को आयोजित होने जा रहा है और यह पूरी तरह निशुल्क होगा। यह प्रातः सात बजे से साढ़े आठ बजे तक होगा।ओशो इस ध्यान को जेट स्पीड मैडिटेशन की संज्ञा देते हैं, क्योंकि इसे आप मात्र तीन दिन करके ही अपने […]Read More
वेद और तंत्र ओशो- भारत में दो परम्पराएं हैं—एक परम्परा है वेदों की और दूसरी है तंत्र की। वेदों की परम्परा अधिक औपचारिक है, जिसकी प्रकृति में संस्कार है। वेद कहीं अधिक सामाजिक और संगठनात्मक है जबकि तंत्र वैयक्तिक अधिक है। उसका सम्बन्ध, संस्कारों, आदतों और रूपों से बहुत कम है, उसका सम्बंध आधारभूत तत्व […]Read More