ओशो- सोचेंगे आप, तिलक के संबंध में मैं यह क्यों कह रहा हूं? हर बच्चे के माथे पर तिलक लगा दिया, जब कि उसे कुछ पता नहीं है। कभी उसे पता होगा, कभी उसे पता चलेगा, तब वह इस तिलक के राज को समझ पाएगा। इशारा कर दिया गया है किसी जगह का, ठीक जगह […]Read More
ओशो- वैज्ञानिकों का कहना है कि जब हमारी पृथ्वी नहीं बनी थी, तब जो किरणें चली होंगी, एक दिन जब हमारी पृथ्वी समाप्त हो चुकी होगी तब पार होंगी। उन किरणों को कभी पता ही नहीं चलेगा कि बीच में यह पृथ्वी के होने की घटना घट गई। जब पृथ्वी नहीं थी तब वे चलीं […]Read More
ओशो- इस संबंध में टीके के लिए भी पूछा है तो वह भी खयाल में ले लेना चाहिए। तिलक से थोड़ा हट कर टीके का प्रयोग शुरू हुआ। विशेषकर स्त्रियों के लिए शुरू हुआ। उसका कारण वही था, लेकिन योग का ही अनुभव काम कर रहा था। असल में स्त्रियों का आज्ञाचक्र बहुत कमजोर चक्र […]Read More
भिलाई/ ओशो आश्रम भिलाई-3 में ओशो संबोधि दिवस के अवसर पर एकदिवसीय ध्यान शिविर का आयोजन 21मार्च 2025 दिन शुक्रवार को स्वामी धर्म चैतन्य के सानिध्य में किया जाएगा। यह शिविर ओशो के संन्यासियों और प्रत्येक व्यक्ति जो भी ध्यान में रुचि रखने वाले हैं उनके लिए एक अद्वितीय अवसर प्रदान करेगा। इस शिविर में […]Read More
ओशो- जैसे-जैसे यह तिलक नीचे आता जाएगा वैसे-वैसे प्रयोग बदलने पड़ेंगे साधना के। यह करीब-करीब वैसा ही काम करेगा जैसे कि अस्पताल में मरीज के पास लटका हुआ चार्ट काम करता है। वह नर्स आकर, देख कर चार्ट पर लिख जाती है–कितना है ताप, कितना है ब्लडप्रेशर, क्या है, क्या नहीं है। डॉक्टर को आकर […]Read More
ओशो– ये दोनों घटनाएं मैंने आपसे कहीं यह इंगित करने को कि आपकी दोनों आंखों के बीच में एक बिंदु है जहां से यह संसार नीचे छूट जाता है और दूसरा संसार शुरू होता है। वह बिंदु द्वार है। उसके इस पार, जिस जगत से हम परिचित हैं वह है, उसके उस पार एक अपरिचित […]Read More
ओशो- एक दूसरी घटना और, और तब मैं आपको तिलक के संबंध में कुछ कहूं, तब आपकी समझ में आना आसान होगा; क्योंकि तिलक का संबंध उस तीसरी आंख से है। उन्नीस सौ पैंतालीस में एक आदमी मरा अमरीका में–एडगर कायसी। चालीस साल पहले उन्नीस सौ पांच में वह बीमार पड़ा और बेहोश हो गया। […]Read More
ओशो- तिलक के संबंध में समझने के पहले दो छोटी सी घटनाएं आपसे कहूंगा, फिर आसान हो सकेगा। दो ऐतिहासिक तथ्य। अठारह सौ अट्ठासी में दक्षिण के एक छोटे से परिवार में एक व्यक्ति पैदा हुआ–फिर पीछे तो वह विश्वविख्यात हुआ, रामानुजम–बहुत गरीब ब्राह्मण के घर में, बहुत थोड़ी सी शिक्षा मिली। लेकिन उस छोटे […]Read More
ओशो- उत्सव किसी इच्छा की पूर्ति के कारण नहीं है। इच्छा केवल वर्तमान क्षण से बचने का एक तरीका है। इच्छा भविष्य का निर्माण करती है और आपको दूर ले जाती है। इच्छा एक नशा है। यह आपको मदहोश रखती है और वास्तविकता को देखने नहीं देती – जो यहीं और अभी है।उत्सव का अर्थ […]Read More
आपने देखा होगा कि होली के मौके पर लोग रंग खेलने के लिए पुराने कपड़े पहनकर दोस्तों के बीच आते हैं। जबकि अमेरिका और दूसरे विकसित देशों में मनाए जाने वाले होली में लोग नए कपड़े पहनकर होली का आंनद होली लेते हैं ओशो- संपन्न समाज में उत्सव प्रवेश कर सकता है, गरीब समाज में […]Read More