ओशो- कुछ आहार उत्तेजक आहार हैं, उत्तेजना देते हैं। वे सब बाधा हैं आध्यात्मिक जीवन में। कुछ आहार अनुत्तेजक हैं। वे कोई उत्तेजना नहीं देते। वे आध्यात्मिक जीवन में सहयोगी होते हैं। कुछ आहार हैं जो मादक हैं, जो नशा देते हैं। कुछ आहार गैर-मादक हैं, नशा नहीं देते हैं। मादक आहार, उत्तेजक आहार, बाधा हैं आध्यात्मिक जीवन में, लेकिन मादक आहार के प्रति हमारी जो आकांक्षा है, जो रस है, उत्तेजक आहार को लेने की जो हमारे भीतर वासना है, वह ध्यान से विलीन होगी। जैसे-जैसे चित्त शांत होने लगेगा, वैसे-वैसे आहार में परिवर्तन होने लगेगा।
अभी मेरे पास ऐसी कुछ घटनाएं घटी हैं। कुछ मित्र थे जो मांसाहारी थे। वे जब शुरू-शुरू में मेरे पास आए, तो उन्होंने मुझसे आते से ही यह पूछा कि “हम मांसाहारी हैं, कहीं आप इस ध्यान में यह बाधा तो नहीं डालते हैं कि मांसाहार छोड़ना पड़ेगा। हम लोग यह नहीं छोड़ सकते।’ तो मैंने उनसे कहा, “मैं आहार की तो कोई बात ही नहीं करता। आपको जो खाना है, मजे से खाओ। मुझे कुछ लेना-देना नहीं है, लेकिन ध्यान शुरू करो।’