सत्रह साल की उम्र थी रमण की। परिवार में किसी की मृत्यु हो गयी। रमण ने मृत्यु को घटते देखा। अभी-अभी था यह आदमी, अभी-अभी नहीं हो गया! न किसी को देखा आते न किसी को देखा जाते। सब वैसा ही का वैसा। नाक, मुंह, आंख, कान सब वैसे, हाथ–पैर सब वैसे। एक क्षण पहले यह था और एक क्षण बाद न रहा। हुआ क्या! कौन चला गया! कहां चला गया! कहां से आया था!