मोरारजी को बहुत लोगों ने समझाया कि शादी तो अब तुम कर ही लेना जिससे करनी है, लेकिन कम से कम अभी कुछ दिन तो रुक जाओ! मगर वे नहीं रुके। पिता मर गए, लेकिन तारीख जो उन्होंने तय कर ली थी, ठीक तीन दिन बाद, पिता की आत्महत्या के तीन दिन बाद शादी हुई। शादी वे करके ही रहे। अब तो कोई विरोध करने वाला भी नहीं था। अब तो अगर महीने-पंद्रह दिन रुक जाते तो कुछ हर्ज न था। लेकिन एक तरह की अमानवीयता…।