बेमेतरा CMHO डॉ. अमृतलाल रोहलेडर निलंबित, महिला स्वास्थ्य अधिकारियों से दुर्व्यवहार के आरोपों पर सरकार की सख्त कार्रवाई

 बेमेतरा CMHO डॉ. अमृतलाल रोहलेडर निलंबित, महिला स्वास्थ्य अधिकारियों से दुर्व्यवहार के आरोपों पर सरकार की सख्त कार्रवाई

रायपुर। छत्तीसगढ़ शासन ने बेमेतरा जिले के मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) डॉ. अमृतलाल रोहलेडर के खिलाफ बड़ी प्रशासनिक कार्रवाई करते हुए उन्हें निलंबित कर दिया है। महिला सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारियों की ओर से लगाए गए अभद्र व्यवहार, अमर्यादित टिप्पणियों और अनुचित स्पर्श संबंधी आरोपों की विभागीय जांच के बाद यह कार्रवाई की गई।

शिकायत के बाद शुरू हुई विभागीय जांच

मामले की शिकायत सामने आने के बाद स्वास्थ्य विभाग ने जांच की प्रक्रिया शुरू की। जांच के दौरान शिकायतकर्ता महिला सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारियों सहित संबंधित कर्मचारियों के बयान दर्ज किए गए और उपलब्ध तथ्यों की पड़ताल की गई।

जांच अधिकारी द्वारा प्रस्तुत रिपोर्ट में डॉ. रोहलेडर के खिलाफ लगाए गए आरोप प्रथम दृष्टया प्रमाणित पाए गए। रिपोर्ट में मामले को गंभीर मानते हुए उनके विरुद्ध अनुशासनात्मक कार्रवाई की अनुशंसा की गई थी।

महिलाओं की गरिमा से समझौता नहीं : स्वास्थ्य मंत्री

मामले में स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने सख्त रुख अपनाया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकारी संस्थानों और कार्यस्थलों पर महिलाओं की गरिमा, सम्मान और सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है।

उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य विभाग में कार्यरत अधिकारियों और कर्मचारियों से जिम्मेदार, संवेदनशील एवं मर्यादित आचरण की अपेक्षा की जाती है। यदि कोई अधिकारी कार्यस्थल की मर्यादा का उल्लंघन करता है और जांच में दोषी पाया जाता है, तो उसके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।

सिविल सेवा नियमों के तहत निलंबन

शासन की ओर से डॉ. रोहलेडर के निलंबन की कार्रवाई छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण तथा अपील) नियम, 1966 के नियम 9(1)(क) के तहत की गई है।

निलंबन अवधि में उनका मुख्यालय संभागीय संयुक्त संचालक, स्वास्थ्य सेवाएं, जगदलपुर संभाग (बस्तर) निर्धारित किया गया है। आदेश के अनुसार वे सक्षम अधिकारी की पूर्व अनुमति के बिना मुख्यालय से बाहर नहीं जा सकेंगे।

निलंबन अवधि में मिलेगा जीवन निर्वाह भत्ता

निलंबन के दौरान डॉ. रोहलेडर को नियमानुसार जीवन निर्वाह भत्ते की पात्रता होगी। शासन के इस निर्णय को कार्यस्थल पर अनुशासन और महिलाओं के सम्मान से जुड़े मामलों में सख्त प्रशासनिक रुख के तौर पर देखा जा रहा है।

स्वास्थ्य विभाग की इस कार्रवाई से यह संदेश गया है कि पद और जिम्मेदारी चाहे कितनी भी बड़ी हो, कार्यस्थल पर अनुचित आचरण के आरोपों की जांच के बाद दोष प्रथम दृष्टया सामने आने पर शासन कार्रवाई से पीछे नहीं हटेगा।