धार्मिक पंडालों पर टैक्स के आदेश को महापौर ने बताया गलत, बोले- पूजा समितियों पर शुल्क थोपना उचित नहीं
भिलाई-चरोदा निगम की एमआईसी बैठक में उठा मुद्दा; महापौर निर्मल कोसरे ने कहा- बड़े धार्मिक आयोजनों से शुल्क लिया जाए, छोटे पूजा पंडालों को राहत मिले
भिलाई-चरोदा। भिलाई-चरोदा नगर निगम में सोमवार को मेयर इन काउंसिल (एमआईसी) की बैठक आयोजित की गई। बैठक में विभिन्न प्रशासनिक और जनहित से जुड़े मुद्दों पर चर्चा हुई। इस दौरान वार्ड क्रमांक 14 की सहायिका के लगातार अनुपस्थित रहने के मामले में कार्रवाई का प्रस्ताव पारित किया गया। परियोजना अधिकारी की शिकायत पर संबंधित सहायिका को पहले भी कई बार नोटिस जारी किया जा चुका है।
बैठक में राज्य शासन के उस आदेश को लेकर भी चर्चा हुई, जिसमें धार्मिक एवं सार्वजनिक आयोजनों के आयोजकों से टैक्स वसूलने के लिए नगर पंचायत, नगर पालिका और नगर निगमों को निर्देश दिए गए हैं। बैठक के बाद महापौर निर्मल कोसरे ने पत्रकारों से चर्चा करते हुए धार्मिक आयोजनों के लिए पंडाल के आकार के आधार पर टैक्स वसूली के फैसले पर सवाल उठाए।
वर्गफीट के हिसाब से टैक्स लेना उचित नहीं: कोसरे
महापौर निर्मल कोसरे ने कहा कि धार्मिक आयोजनों के लिए पंडाल के आकार के आधार पर शुल्क तय करना उचित नहीं है। उन्होंने कहा कि प्रदेश के कई नगर निगम और नगर पालिकाओं ने धार्मिक पंडालों के लिए शुल्क की दर निर्धारित कर दी है, लेकिन भिलाई-चरोदा नगर निगम ने अभी तक ऐसी कोई दर तय नहीं की है।
महापौर ने कहा कि उन्हें जानकारी मिली है कि बिना अनुमति लगाए गए पूजा पंडालों को निगम और पुलिस प्रशासन द्वारा हटाने की कार्रवाई की जा सकती है। ऐसे में उन्होंने सभी पूजा समितियों से अपील की कि पंडाल निर्माण से पहले नगर निगम और पुलिस प्रशासन से आवश्यक अनुमति जरूर लें।
उन्होंने कहा कि पूजा पंडालों में आने वाले श्रद्धालुओं की सुरक्षा को प्राथमिकता दी जानी चाहिए। इसके साथ ही वाहनों की पार्किंग के लिए पर्याप्त व्यवस्था हो, ताकि मुख्य सड़कों पर यातायात बाधित न हो।
दर्शन और पार्किंग के नाम पर शुल्क न लेने की अपील
महापौर ने पूजा समितियों से भगवान के दर्शन और वाहन पार्किंग के नाम पर किसी भी प्रकार का शुल्क नहीं लेने की अपील की। उन्होंने कहा कि धार्मिक आयोजन श्रद्धा और आस्था से जुड़े होते हैं, इसलिए समितियों को व्यवस्थाओं का विशेष ध्यान रखते हुए श्रद्धालुओं को परेशानी से बचाना चाहिए।
उन्होंने यह भी कहा कि मुख्य सड़कों पर इस तरह पंडाल नहीं लगाए जाने चाहिए, जिससे यातायात व्यवस्था प्रभावित हो। आयोजकों को प्रशासन के निर्देशों और सुरक्षा मानकों का पालन करना चाहिए।
धार्मिक आयोजनों से टैक्स के फैसले पर भाजपा सरकार को घेरा
राज्य शासन के धार्मिक आयोजनों से टैक्स लेने के फैसले को लेकर महापौर ने भाजपा सरकार पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा कि धार्मिक आयोजनों से इस तरह टैक्स लेना उचित नहीं है। राज्य शासन ने यह निर्णय किस उद्देश्य से लिया है, यह समझ से परे है।
कोसरे ने कहा कि दुर्ग जिले में कई बड़े धार्मिक आयोजन होते हैं, जिनमें छत्तीसगढ़ के साथ-साथ दूसरे राज्यों से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं। उन्होंने कहा कि यदि किसी बड़े धार्मिक आयोजन में बड़े स्तर पर अस्थायी व्यवस्थाएं की जाती हैं, तो वहां शुल्क लेने पर विचार किया जा सकता है, लेकिन छोटे-छोटे पूजा पंडालों से टैक्स वसूलना उचित नहीं होगा।
रायपुर निगम की दर का दिया उदाहरण
महापौर ने दावा किया कि राज्य शासन के आदेश के बाद रायपुर नगर निगम ने धार्मिक आयोजनों के लिए 5 रुपए प्रति वर्गफीट प्रतिदिन की दर निर्धारित की है। उन्होंने इसी को लेकर राज्य सरकार पर सवाल उठाते हुए कहा कि जब प्रदेश में भाजपा की डबल इंजन सरकार है, तो फिर नगर निकायों के सामने फंड की कमी की स्थिति क्यों पैदा हो रही है।
महापौर ने कहा कि धार्मिक आयोजनों और पूजा समितियों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ डालने के बजाय सरकार को नगर निकायों को पर्याप्त आर्थिक संसाधन उपलब्ध कराने पर ध्यान देना चाहिए।



