रेलवे में क्लर्क की नौकरी का झांसा देकर 5.92 लाख की ठगी का आरोप, खुर्सीपार थाने में मामला दर्ज
एक सप्ताह में नौकरी लगाने का दिया था भरोसा, स्टांप पेपर पर लिखित आश्वासन के बावजूद न नौकरी मिली, न रकम वापस
भिलाई। रेलवे विभाग में क्लर्क की नौकरी लगाने का झांसा देकर 5 लाख 92 हजार रुपये की ठगी किए जाने का मामला सामने आया है। कबीरधाम जिले के ग्राम मजगांव निवासी भागीरथी पटेल की शिकायत पर खुर्सीपार पुलिस ने न्यू खुर्सीपार बंगाली कॉलोनी निवासी चंचल पाल के खिलाफ धोखाधड़ी का मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
पुलिस के मुताबिक, शिकायतकर्ता भागीरथी पटेल की चंचल पाल से रायपुर में जान-पहचान हुई थी। आरोप है कि चंचल पाल ने खुद को प्रभावशाली लोगों से संपर्क वाला बताते हुए भागीरथी को रेलवे विभाग में क्लर्क की सरकारी नौकरी लगवाने का भरोसा दिया। इसके लिए आरोपी ने करीब 6 लाख रुपये की मांग की।
शिकायत के अनुसार, 27 दिसंबर 2022 को दोपहर करीब 2 बजे भागीरथी पटेल ने 5 लाख 92 हजार रुपये नगद आरोपी चंचल पाल के न्यू खुर्सीपार स्थित घर पर दो गवाहों की मौजूदगी में दिए। शिकायतकर्ता का कहना है कि शेष राशि फोन-पे के माध्यम से दी गई। रकम लेने के संबंध में आरोपी ने 50 रुपये के स्टांप पेपर पर नोटरी कराकर लिखित दस्तावेज भी दिया था।
आरोप है कि चंचल पाल ने एक सप्ताह के भीतर रेलवे में नौकरी लगवाने की गारंटी दी थी। साथ ही नौकरी नहीं लगने की स्थिति में पूरी रकम वापस करने की बात कही थी। लेकिन निर्धारित समय बीतने के बाद भी न तो नौकरी लगी और न ही आरोपी ने रकम वापस की। लंबे समय तक रकम वापस नहीं मिलने पर भागीरथी ने पुलिस से शिकायत कर कार्रवाई की मांग की।
दो अन्य लोगों से भी रकम लेने का आरोप
शिकायत में भागीरथी पटेल ने यह भी आरोप लगाया है कि चंचल पाल ने अन्य लोगों को भी रेलवे में क्लर्क की नौकरी लगाने का झांसा दिया। शिकायत के मुताबिक, संतोष पटेल निवासी ग्राम भागूटोला से 3 लाख 77 हजार रुपये तथा नेतराम पटेल निवासी ग्राम बांधाटोला से 4 लाख 80 हजार रुपये नौकरी लगाने के नाम पर लिए गए। शिकायतकर्ता का दावा है कि इन दोनों की भी नौकरी नहीं लगाई गई।
मामले में पुलिस ने शिकायत आवेदन के अवलोकन के बाद प्रथम दृष्टया धोखाधड़ी का अपराध पाए जाने पर धारा 420 भारतीय दंड संहिता के तहत अपराध पंजीबद्ध कर विवेचना में लिया है। पुलिस अब शिकायत में लगाए गए आरोपों, रकम के लेन-देन, स्टांप पेपर पर किए गए दस्तावेज और अन्य संबंधित साक्ष्यों की जांच कर रही है। जांच के दौरान अन्य पीड़ितों और गवाहों के बयान भी लिए जा सकते हैं।
पुलिस जांच के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि नौकरी लगाने के नाम पर कितने लोगों से रकम ली गई और इस पूरे मामले में कुल कितनी राशि का लेन-देन हुआ है।



