नगर निगम की छत पर बदहाली का मंजर, टूटे सोफे और शराब की बोतलों ने खोली व्यवस्था की पोल
जहां होना चाहिए विकास का हिसाब, वहां पसरा है कबाड़! भिलाई चरोदा निगम की छत की तस्वीरें व्यवस्था पर उठा रहीं गंभीर सवाल
भिलाई चरोदा। नगर के विकास और साफ-सफाई की जिम्मेदारी संभालने वाले भिलाई चरोदा नगर निगम की छत की सामने आई तस्वीरें व्यवस्था की एक अलग ही कहानी बयां कर रही हैं। छत पर जगह-जगह टूटे-फूटे सोफे, बिखरा कचरा, लकड़ी के टुकड़े, प्लास्टिक और कई खाली शराब व बीयर की बोतलें नजर आ रही हैं। बदहाल स्थिति को देखकर सवाल उठना स्वाभाविक है कि जब निगम की अपनी छत का यह हाल है, तो शहर की सफाई और व्यवस्था का क्या हाल होगा?
तस्वीरों में पुराने और क्षतिग्रस्त सोफे बेतरतीब तरीके से पड़े दिखाई दे रहे हैं। कई सोफों की हालत इतनी खराब है कि उनका इस्तेमाल संभव नजर नहीं आता। इनके आसपास कचरे का ढेर और शराब व बीयर की खाली बोतलें भी पड़ी हुई हैं। छत की दीवारों पर गंदगी और सीलन के निशान भी साफ दिखाई दे रहे हैं।
निगम की छत बनी कबाड़खाना!
नगर निगम प्रशासन जहां शहरवासियों से स्वच्छता बनाए रखने और कचरा निर्धारित स्थान पर डालने की अपील करता है, वहीं निगम भवन की छत पर ही इस तरह की अव्यवस्था दिखाई देना अपने आप में बड़ा सवाल खड़ा करता है। आखिर लंबे समय से अनुपयोगी पड़े इन सोफों और कचरे को हटाने की जिम्मेदारी किसकी है? नियमित सफाई और निरीक्षण की व्यवस्था कितनी प्रभावी है, यह तस्वीरें खुद सवाल कर रही हैं।
शराब की बोतलें बनीं सबसे बड़ा सवाल
छत पर मिली शराब और बीयर की खाली बोतलों ने मामले को और गंभीर बना दिया है। सवाल यह भी है कि निगम की छत तक ये बोतलें कैसे पहुंचीं और यहां ऐसी स्थिति बनने के बाद जिम्मेदार अधिकारियों की नजर इस ओर क्यों नहीं गई? हालांकि केवल खाली बोतलों की मौजूदगी से यह निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता कि उनका सेवन वहीं हुआ, लेकिन सार्वजनिक भवन की छत पर इस तरह बोतलों और कचरे का पड़ा होना निश्चित तौर पर निगम की निगरानी व्यवस्था पर सवाल खड़े करता है।
तस्वीरें पूछ रहीं सवाल—जिम्मेदार कौन?
नगर निगम से जुड़े जिम्मेदार अधिकारियों को चाहिए कि वे मामले का संज्ञान लेकर छत की तत्काल सफाई कराएं, अनुपयोगी फर्नीचर हटवाएं और यह भी जांच कराएं कि निगम भवन की छत पर इस तरह की स्थिति आखिर कैसे बनी। साथ ही नियमित निरीक्षण की व्यवस्था सुनिश्चित की जानी चाहिए।
भिलाई चरोदा के विकास और स्वच्छता की बड़ी-बड़ी बातें करने वाले प्रशासन के सामने अब सवाल यह है कि जब अपने ही कार्यालय की छत कबाड़ और गंदगी से मुक्त नहीं हो पा रही, तो शहर को स्वच्छ और व्यवस्थित रखने का दावा आखिर कितना जमीन पर उतर रहा है?
तस्वीरें बहुत कुछ कह रही हैं—अब देखना यह है कि जिम्मेदार अधिकारी इन तस्वीरों को देखकर भी आंखें मूंदते हैं या व्यवस्था को आईना दिखाने वाली इस तस्वीर पर कोई ठोस कार्रवाई करते हैं।

