रायपुर में नौकरी के नाम पर बड़ा फर्जीवाड़ा: पुलिसकर्मी बनकर 6 युवाओं से 25 लाख की ठगी, फर्जी नियुक्ति पत्र देकर किया गुमराह
रायपुर। राजधानी रायपुर में सरकारी नौकरी दिलाने का झांसा देकर लाखों रुपये की ठगी का सनसनीखेज मामला सामने आया है। खुद को पुलिस विभाग का आरक्षक बताने वाले एक व्यक्ति ने छह बेरोजगार युवाओं को विश्वविद्यालय में नौकरी दिलाने का भरोसा दिलाया और उनसे करीब 25 लाख रुपये वसूल लिए। बाद में दिए गए नियुक्ति पत्र और चयन सूची पूरी तरह फर्जी निकले।
पुलिस ने मामले में आरोपी के खिलाफ अपराध दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। साथ ही उसके संभावित सहयोगियों और ठगी की रकम के लेन-देन की भी पड़ताल की जा रही है।
माध्यमिक शिक्षा मंडल कार्यालय में हुई पहचान
शिकायतकर्ता देवेंद्र कुमार वर्मा के अनुसार रोजगार संबंधी कार्यों के सिलसिले में उनकी मुलाकात इमरान कादरी नामक व्यक्ति से हुई थी। इमरान ने स्वयं को पुलिस लाइन रायपुर में पदस्थ आरक्षक बताया और विश्वविद्यालय प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारियों से अपनी निकटता का दावा किया।
आरोपी ने भरोसा दिलाया कि वह महात्मा गांधी उद्यानिकी एवं वानिकी विश्वविद्यालय में वर्ष 2023 की भर्ती प्रक्रिया के तहत बैक डेट में आवेदन करवाकर नौकरी दिला सकता है।
विभिन्न पदों पर नियुक्ति का दिया लालच
आरोपी ने सहायक ग्रेड-3, प्रयोगशाला तकनीशियन और भृत्य जैसे पदों पर नियुक्ति दिलाने का आश्वासन दिया। इस झांसे में शिकायतकर्ता सहित कुल छह लोग आ गए।
बताया गया कि नौकरी दिलाने के एवज में आरोपी ने कुल 30 लाख रुपये की मांग की थी। चयन सूची दिखाकर उसने अभ्यर्थियों का विश्वास जीत लिया और चरणबद्ध तरीके से रकम लेना शुरू कर दिया।
तीन किस्तों में वसूले गए लाखों रुपये
पीड़ितों के अनुसार मई और जून 2026 के दौरान आरोपी को अलग-अलग चरणों में नकद राशि सौंपी गई।
- पहली बार 15 लाख रुपये नकद दिए गए।
- इसके बाद कथित नियुक्ति पत्र मिलने पर 9 लाख रुपये और दिए गए।
- फिर आरोपी के कहने पर एक अन्य व्यक्ति को 1 लाख रुपये सौंपे गए।
इस तरह कुल 25 लाख रुपये आरोपी के कब्जे में पहुंच गए।
फर्जी निकले नियुक्ति पत्र और चयन सूची
30 मई को आरोपी ने सभी अभ्यर्थियों को नियुक्ति पत्र सौंपते हुए 5 जून को विश्वविद्यालय में ज्वाइन करने के निर्देश दिए।
निर्धारित तिथि पर जब अभ्यर्थी विश्वविद्यालय पहुंचे तो अधिकारियों ने दस्तावेजों की जांच के बाद स्पष्ट कर दिया कि प्रस्तुत नियुक्ति पत्र और चयन सूची विश्वविद्यालय द्वारा जारी नहीं किए गए हैं। जांच में सभी दस्तावेज फर्जी और कूटरचित पाए गए।
रकम वापस मांगने पर दी चुनौती
पीड़ितों का आरोप है कि ठगी का खुलासा होने के बाद जब उन्होंने अपनी रकम वापस मांगी तो आरोपी ने भुगतान से साफ इंकार कर दिया। वह लगातार स्थान बदलने और अलग-अलग बहाने बनाने की बात कहता रहा।
शिकायतकर्ताओं का कहना है कि आरोपी ने यहां तक कह दिया कि जहां शिकायत करनी हो कर दो, वह पैसे वापस नहीं करेगा।
पुलिस ने दर्ज किया मामला
मामले की शिकायत मिलने के बाद सिटी कोतवाली पुलिस ने आरोपी इमरान कादरी के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 318(4) के तहत अपराध दर्ज किया है।
जांच टीम फर्जी नियुक्ति पत्रों, चयन सूची, मोबाइल चैट, कॉल रिकॉर्ड और आर्थिक लेन-देन से जुड़े दस्तावेजों की जांच कर रही है। पुलिस यह भी पता लगाने में जुटी है कि इस पूरे नेटवर्क में और कौन-कौन लोग शामिल हैं।
बैंक खाते और संपत्ति की भी होगी जांच
पुलिस सूत्रों के मुताबिक जांच के दौरान आरोपी के बैंक खातों, संपत्तियों और ठगी की रकम के उपयोग की भी पड़ताल की जाएगी। यदि अन्य लोगों की संलिप्तता सामने आती है तो उनके खिलाफ भी कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
फिलहाल आरोपी फरार बताया जा रहा है और उसकी तलाश जारी है।

