अमलेश्वर में प्लॉट बेचने के नाम पर कथित ठगी का मामला, तीन लोगों पर एफआईआर
दुर्ग। अमलेश्वर क्षेत्र में जमीन की खरीद-बिक्री से जुड़े एक कथित धोखाधड़ी मामले में पुलिस ने तीन व्यक्तियों के खिलाफ अपराध दर्ज किया है। आरोप है कि जमीन के नाम पर खरीदारों से लाखों रुपये लेने के बाद उन्हें वैध कब्जा और प्रमाणीकरण योग्य भूमि उपलब्ध नहीं कराई गई। मामले में फर्जी दस्तावेज तैयार करने, अवैध प्लाटिंग करने और एक ही जमीन को कई लोगों को बेचने जैसी शिकायतें सामने आई हैं।
शिकायत के आधार पर दर्ज हुआ मामला
अमलेश्वर थाना पुलिस के अनुसार रायपुर के धनलक्ष्मी नगर निवासी अहमद अली (52) की शिकायत पर पींकू घोष, नरेश दमोहे और राजेश चंद्राकर के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है। पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की विभिन्न धाराओं के तहत अपराध पंजीबद्ध कर जांच शुरू कर दी है।
घर बनाने के लिए खरीदा था प्लॉट
शिकायतकर्ता अहमद अली ने पुलिस को बताया कि वर्ष 2013 में वह घर निर्माण के लिए जमीन की तलाश कर रहे थे। इसी दौरान उनकी मुलाकात राजेश चंद्राकर से हुई, जिसने स्वयं को एक रियल एस्टेट फर्म का प्रतिनिधि बताते हुए ग्राम मोतीपुर स्थित टीएनसी स्वीकृत प्लॉट उपलब्ध कराने का दावा किया।
इसके बाद उनकी मुलाकात पींकू घोष और नरेश दमोहे से कराई गई। बातचीत के बाद 300 रुपये प्रति वर्गफुट की दर से 3,000 वर्गफुट भूमि खरीदने का सौदा तय हुआ और भुगतान किस्तों में किया जाने लगा।
आठ वर्षों तक किया भुगतान
शिकायत के मुताबिक वर्ष 2013 से 2021 के बीच अहमद अली ने किस्तों, नकद राशि और बैंकिंग माध्यमों से करीब 15 लाख रुपये का भुगतान किया। पूरी राशि जमा होने के बाद जब उन्होंने रजिस्ट्री की मांग की तो उन्हें बताया गया कि पहले बुक किया गया प्लॉट किसी अन्य व्यक्ति को बेच दिया गया है।
बाद में आरोपितों ने दूसरे खसरा नंबर की जमीन उपलब्ध कराने का प्रस्ताव दिया। मार्च 2021 में नई भूमि की रजिस्ट्री कराई गई और शेष राशि भी वसूल ली गई।
राजस्व जांच में सामने आईं विसंगतियां
रजिस्ट्री के बाद भूमि के प्रमाणीकरण की प्रक्रिया पूरी नहीं हो सकी। शिकायतकर्ता द्वारा राजस्व विभाग से जानकारी लेने पर पता चला कि संबंधित खसरे की भूमि से अधिक रकबा पहले ही विभिन्न लोगों को बेचा जा चुका है। इसके चलते दस्तावेजों का प्रमाणीकरण संभव नहीं हो पाया।
शिकायत में यह भी दावा किया गया है कि जिस भूमि का विक्रय किया गया, वह वास्तविक रूप से उपलब्ध नहीं है और उसी जमीन को कई अन्य खरीदारों के नाम पर भी बेचा गया है।
कई अन्य लोगों के साथ भी ठगी की आशंका
मामले में केवल एक व्यक्ति ही नहीं, बल्कि कई अन्य लोगों के प्रभावित होने की बात सामने आई है। शिकायत में उल्लेख किया गया है कि राधिका श्रीवास, आशा यादव, शेष सिन्हा, शिव प्रसाद संभाकर और स्मिता नायर सहित लगभग 30 से 35 लोगों के साथ भी इसी प्रकार की कथित धोखाधड़ी हुई है।
आरोप है कि कूटरचित दस्तावेजों के सहारे अवैध प्लाटिंग कर बड़ी संख्या में खरीदारों से रकम वसूली गई।
दस्तावेजों और भूमि अभिलेखों की होगी जांच
अमलेश्वर थाना पुलिस ने प्रकरण दर्ज कर विस्तृत विवेचना शुरू कर दी है। जांच के दौरान भूमि संबंधी दस्तावेजों, राजस्व अभिलेखों और रजिस्ट्री रिकॉर्ड की पड़ताल की जाएगी। साथ ही अन्य संभावित पीड़ितों के बयान भी दर्ज किए जाएंगे ताकि पूरे मामले की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सके।
पुलिस का कहना है कि जांच में सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

