पटवारी भर्ती का झांसा देकर 6.50 लाख की ठगी, कांग्रेस पदाधिकारी गिरफ्तार; संगठन ने भी दिखाई सख्ती
कोंडागांव। सरकारी नौकरी की तलाश कर रहे युवाओं को झूठे सपने दिखाकर ठगी करने के मामलों के बीच कोंडागांव में एक चर्चित मामला सामने आया है। पटवारी भर्ती में चयन कराने का भरोसा देकर एक युवक से लाखों रुपये लेने के आरोप में कांग्रेस के जिला महामंत्री रहे रितेश पटेल को पुलिस ने गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है। मामले के सामने आने के बाद कांग्रेस संगठन ने भी तत्काल कार्रवाई करते हुए उन्हें पार्टी से निष्कासित कर दिया।
नौकरी दिलाने के नाम पर लाखों की वसूली का आरोप
पुलिस के अनुसार ग्राम गिरोला निवासी अभिराम सोरी ने शिकायत दर्ज कराई थी कि वर्ष 2017 में निकली पटवारी भर्ती के दौरान उसके परिचित रितेश पटेल ने चयन सुनिश्चित कराने का दावा किया था। शिकायतकर्ता का आरोप है कि इसी भरोसे में उसने अलग-अलग समय पर कुल 6 लाख 50 हजार रुपये आरोपी को सौंप दिए।
समय बीतने के बावजूद न तो भर्ती में चयन हुआ और न ही कथित रूप से दी गई रकम वापस मिली। कई बार मांग करने के बाद भी पैसा नहीं लौटाया गया, जिसके बाद पीड़ित ने पुलिस की शरण ली।
शिकायत के बाद हरकत में आई पुलिस
मामले की गंभीरता को देखते हुए कोंडागांव पुलिस ने धोखाधड़ी का अपराध दर्ज कर जांच शुरू की। पुलिस अधीक्षक पंकज चंद्रा के निर्देश पर थाना कोंडागांव और साइबर सेल की संयुक्त टीम गठित की गई।
जांच के दौरान जुटाए गए तथ्यों और साक्ष्यों के आधार पर आरोपी रितेश पटेल को उसके निवास से हिरासत में लिया गया। पूछताछ के बाद पुलिस ने उसे औपचारिक रूप से गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश किया, जहां से उसे न्यायिक अभिरक्षा में जेल भेज दिया गया।
पुराने मामलों का भी रहा है रिकॉर्ड
पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार आरोपी का नाम इससे पहले भी विभिन्न आपराधिक मामलों में सामने आ चुका है। ठगी, बलवा और प्रतिबंधात्मक कार्रवाई से जुड़े मामलों में वह पूर्व में भी जेल जा चुका है। ऐसे में वर्तमान मामला उसके आपराधिक इतिहास में एक और गंभीर आरोप के रूप में जुड़ गया है।
कांग्रेस ने भी बनाई दूरी
गिरफ्तारी की खबर सामने आने के बाद कांग्रेस संगठन ने भी त्वरित कार्रवाई की। पार्टी नेतृत्व ने संगठन की छवि को ध्यान में रखते हुए रितेश पटेल को जिला महामंत्री पद सहित पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से निष्कासित कर दिया।
राजनीतिक गलियारों में इस कार्रवाई को संगठन की ओर से स्पष्ट संदेश के रूप में देखा जा रहा है कि आपराधिक आरोपों से घिरे पदाधिकारियों को संरक्षण नहीं दिया जाएगा।
संयुक्त टीम ने की कार्रवाई
पूरे मामले की जांच और गिरफ्तारी की कार्रवाई में थाना प्रभारी सौरभ उपाध्याय, उपनिरीक्षक पिताम्बर कठार, निहार रंजन मंडल तथा साइबर सेल के प्रधान आरक्षक हरेंद्र कश्यप, आरक्षक संतोष कोड़ोपी और बिरझू सोरी की महत्वपूर्ण भूमिका रही।
बड़ा सवाल
यह मामला एक बार फिर बेरोजगार युवाओं को सरकारी नौकरी दिलाने के नाम पर होने वाली ठगी की ओर ध्यान खींचता है। विशेषज्ञों का कहना है कि किसी भी भर्ती प्रक्रिया में चयन का दावा करने वाले बिचौलियों और दलालों से सावधान रहना चाहिए तथा भर्ती से जुड़ी जानकारी केवल अधिकृत सरकारी माध्यमों से ही प्राप्त करनी चाहिए।
(नोट: मामला न्यायालय में विचाराधीन है। आरोपी के खिलाफ लगाए गए आरोपों की अंतिम पुष्टि न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही होगी।)

