विश्व मच्छर दिवस पर भिलाई-3 में जनजागरूकता अभियान आयोजित


भिलाई/ विश्व मच्छर दिवस के अवसर पर प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र भिलाई-3 में विशेष जनजागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. मनोज दानी, खंड चिकित्सा अधिकारी डॉ. भुनेश्वर कठौतिया तथा जिला मलेरिया अधिकारी डॉ. रश्मि गलेड के संयुक्त निर्देश पर संपन्न हुआ। इसका उद्देश्य वैक्टर जनित रोगों जैसे—मलेरिया, डेंगू, फाइलेरिया और चिकनगुनिया से बचाव के प्रति आमजन को जागरूक करना था।
मच्छर जनित रोग और उनकी रोकथाम
कार्यक्रम में बी.ई.ई.टी.ओ. खंड विस्तार प्रशिक्षक एवं स्वास्थ्य अधिकारी सैय्यद असलम ने विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने बताया कि मच्छरों के काटने से अनेक गंभीर बीमारियां फैलती हैं। इनमें मलेरिया, डेंगू, फाइलेरिया और चिकनगुनिया प्रमुख हैं। यदि इनके प्रति समय रहते सावधानी बरती जाए, तो संक्रमण और रोगों की रोकथाम संभव है।
उन्होंने कहा कि मच्छर आमतौर पर रुके हुए पानी में अंडे देते हैं। यह पानी चाहे गंदा हो या साफ, छोटी-सी जगह भी उनके प्रजनन के लिए पर्याप्त होती है। घर की पानी टंकियों, नालियों, खुले बर्तनों, फ्रीज के ट्रे और पक्षियों के पीने के पात्र जैसी जगहों पर पानी जमा होने से मच्छरों की संख्या तेजी से बढ़ जाती है।
जन-जागरूकता के प्रमुख उपाय
सैय्यद असलम ने लोगों से अपील की कि वे मच्छरों की संख्या को नियंत्रित करने और स्वयं को सुरक्षित रखने के लिए कुछ आवश्यक कदम जरूर उठाएं—
- घर की पानी टंकियों को हमेशा ढक्कन से ढककर रखें।
- नालियों में जला हुआ तेल डालें ताकि मच्छर वहां अंडे न दे सकें।
- फ्रीज के पीछे लगे ट्रे और अन्य पानी जमा होने वाले स्थानों को प्रतिदिन साफ करें।
- खुले स्थानों में पड़ी डिस्पोजल वस्तुएं, टायर या अन्य पात्र जहां पानी रुक सकता है, उन्हें नियमित रूप से खाली करें।
- पक्षियों के पानी के बर्तनों को भी रोजाना साफ करें।
इसके अलावा उन्होंने कहा कि पूरी आस्तीन की कमीज पहनना, सोते समय मच्छरदानी का उपयोग करना और शाम के समय दरवाजे-खिड़कियां बंद रखना मच्छरों के काटने से बचाव के लिए बेहद जरूरी है।
कार्यक्रम में रही विशेष उपस्थिति
इस जनजागरूकता कार्यक्रम में स्वास्थ्य विभाग के विभिन्न अधिकारी और कर्मचारी भी सक्रिय रूप से शामिल हुए। सीनियर कंसल्टेंट एल.एच.वी. श्रीमती आर. विश्वास, आर.एम.ए. श्रीमती प्रज्ञा कुशवाहा, लैब टेक्नीशियन आलिया खातून और जसविंदर कौर विरदी विशेष रूप से उपस्थित रहीं।
सभी ने मिलकर उपस्थित नागरिकों को मच्छरों से बचाव की जानकारी दी और उन्हें यह भी समझाया कि यह जिम्मेदारी केवल स्वास्थ्य विभाग की नहीं, बल्कि प्रत्येक नागरिक की है। यदि लोग अपने घर और आसपास के वातावरण को स्वच्छ रखेंगे, तो मच्छरों के प्रकोप को काफी हद तक कम किया जा सकता है।
समापन और संदेश
विश्व मच्छर दिवस पर आयोजित इस कार्यक्रम ने नागरिकों को यह संदेश दिया कि “रोकथाम ही सबसे बड़ा इलाज है।” मच्छरों से होने वाली बीमारियां जानलेवा साबित हो सकती हैं, लेकिन यदि सामूहिक प्रयास और जागरूकता से कदम उठाए जाएं तो इनसे बचाव पूरी तरह संभव है।
कार्यक्रम का समापन इस आह्वान के साथ किया गया कि प्रत्येक परिवार अपने घर में स्वच्छता बनाए रखे और समाज में मच्छरजनित बीमारियों की रोकथाम के लिए जागरूकता फैलाए।



