रायपुर में मिलावटखोरी पर ढील? पांच साल पुराने मामले अब तक नहीं पहुंचे अदालत
Alert chhattisgarh! प्रतिनिधि|
रायपुर: खाद्य सुरक्षा विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठने लगे हैं। जानकारी सामने आई है कि वर्ष 2021 से दर्ज कई मिलावट प्रकरण अब तक न्यायालय की चौखट तक नहीं पहुंचे। नियमानुसार जांच पूर्ण होने के बाद अभियोजन स्वीकृति लेकर मामले अदालत में प्रस्तुत किए जाने चाहिए, लेकिन कई फाइलें वर्षों से लंबित बताई जा रही हैं।
कार्रवाई हुई, लेकिन मुकदमा नहीं
सूत्रों के अनुसार दर्जनभर से अधिक मामलों में केवल सैंपलिंग और प्राथमिक कार्रवाई के बाद प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ी। खाद्य सुरक्षा कानून के तहत समयसीमा में प्रकरण कोर्ट में प्रस्तुत नहीं होने पर आरोपित पक्ष को राहत मिल सकती है। ऐसे में विभागीय देरी आरोपितों के लिए लाभकारी साबित हो सकती है।
नकली पनीर और मिलावटी मिठाइयों के मामले ठंडे बस्ते में
कुशालपुर क्षेत्र में नकली पनीर निर्माण की शिकायत पर कार्रवाई की गई थी, लेकिन मामला अब तक न्यायालय में नहीं पहुंचा। इसी तरह कई होटल और मिठाई दुकानों में मिलावटी बेसन, लड्डू और बार-बार उपयोग किए गए तेल से खाद्य सामग्री तैयार करने के मामले सामने आए, परंतु कानूनी प्रक्रिया अधूरी रह गई।
लेबलिंग गड़बड़ी और एक्सपायरी सामग्री का उपयोग
कुछ प्रतिष्ठानों पर एक्सपायर सॉस और मिस ब्रांडेड उत्पादों के उपयोग, दूध व मिल्क प्रोडक्ट में अनिवार्य विवरण की कमी तथा मानकों से कम गुणवत्ता वाले खाद्य पदार्थ बेचने के आरोप लगे थे। विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे मामलों में अत्यधिक देरी सामान्य प्रशासनिक प्रक्रिया का हिस्सा नहीं मानी जा सकती।
विशेषज्ञों की राय: इतनी लंबी देरी असामान्य
खाद्य सुरक्षा मामलों के जानकारों का कहना है कि बहुपक्षीय मामलों में नोटिस और सुनवाई की प्रक्रिया में समय लग सकता है, लेकिन एकल स्वामित्व वाले होटल या दुकानों के मामलों में कार्रवाई अपेक्षाकृत तेज होती है। वर्ष 2021 के मामलों का अब तक लंबित रहना सवाल खड़े करता है।
ट्रांसफर के बाद भी पदस्थ अधिकारी नहीं हुए रिलीव
खाद्य एवं औषधि प्रशासन विभाग द्वारा 10 फरवरी को जारी स्थानांतरण आदेश के बाद भी एक अधिकारी के रायपुर में ही बने रहने की चर्चा है। अधिकांश अधिकारी नई पदस्थापना में ज्वाइन कर चुके हैं, लेकिन संबंधित अधिकारी लंबित प्रकरणों के निस्तारण में जुटी बताई जा रही हैं। इसी बीच पुराने मामलों में अभियोजन स्वीकृति लंबित होने की बात भी सामने आई है।
लंबित प्रमुख प्रकरण
मामला: मिस ब्रांडेड
अनियमितता: एक्सपायर सॉस व खाद्य सामग्री का उपयोग।
मामला: मिस ब्रांडेड
अनियमितता: एक्सपायर सामग्री का उपयोग एवं दूध उत्पादों में लेबलिंग त्रुटि।
मामला: सब-स्टैंडर्ड / मिस ब्रांडेड
अनियमितता: बूंदी लड्डू मानकों से कम गुणवत्ता के पाए गए।
मामला: सब-स्टैंडर्ड / मिस ब्रांडेड
अनियमितता: बेसन लड्डू गुणवत्ता मानकों के अनुरूप नहीं।
मामला: खाद्य गुणवत्ता उल्लंघन
अनियमितता: बार-बार उपयोग किया गया तेल।
मामला: सब-स्टैंडर्ड (मिलावटी)
अनियमितता: गाठिया बेसन का नमूना मानकों से कम गुणवत्ता का।
सवालों के घेरे में विभागीय जवाबदेही
वर्षों से लंबित इन मामलों ने खाद्य सुरक्षा व्यवस्था की पारदर्शिता और गंभीरता पर प्रश्नचिह्न लगा दिया है। यदि समय पर अभियोजन स्वीकृति लेकर न्यायालय में प्रकरण प्रस्तुत नहीं किए गए, तो यह उपभोक्ता सुरक्षा के उद्देश्य को कमजोर कर सकता है।

