सावधान! गेमिंग प्लेटफॉर्म के जरिए बच्चों को जाल में फंसा रहे आतंकी संगठन, खुलासा: Roblox, Minecraft और Discord पर ‘डिजिटल शिकारी’ की नजर

 सावधान! गेमिंग प्लेटफॉर्म के जरिए बच्चों को जाल में फंसा रहे आतंकी संगठन, खुलासा: Roblox, Minecraft और Discord पर ‘डिजिटल शिकारी’ की नजर

खुलासा: गेमिंग प्लेटफॉर्म पर ‘डिजिटल शिकारी’ की नजर

भिलाई/ मोबाइल गेम की लत अब केवल समय बर्बादी का मामला नहीं रहा, बल्कि यह सुरक्षा से जुड़ी गंभीर चिंता बन चुका है। अंतरराष्ट्रीय मीडिया रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि कुछ चरमपंथी संगठन लोकप्रिय गेमिंग प्लेटफॉर्म्स के जरिए बच्चों को कट्टरपंथ की ओर आकर्षित करने की कोशिश कर रहे हैं।

सोशल मीडिया से गेमिंग तक बदला ठिकाना

जब प्रमुख सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर निगरानी सख्त हुई, तो ऐसे समूहों ने “सैंडबॉक्स गेम्स” की ओर रुख कर लिया — जहां बच्चे अपनी वर्चुअल दुनिया खुद बनाते हैं। 11 से 17 वर्ष के किशोर विशेष रूप से निशाने पर हैं।

गेम के अंदर आतंकी घटनाओं की पुनर्रचना

कुछ मामलों में गेम्स के भीतर वास्तविक हिंसक घटनाओं की री-क्रिएशन की गई, जिससे बच्चों के मन में हिंसा को सामान्य बनाने का खतरा बढ़ता है।

क्यों बन रहे हैं बच्चे आसान शिकार?

  • अकेलापन या सामाजिक अलगाव
  • पहचान को लेकर भ्रम
  • परिवार से संवाद की कमी
फनल स्ट्रैटेजी से जाल:
1• मीम्स या मजाकिया पोस्ट से ध्यान आकर्षित करना।
2• निजी गेम सर्वर पर आमंत्रित करना।
3• एन्क्रिप्टेड चैट प्लेटफॉर्म पर ले जाकर विचारधारात्मक ब्रेनवॉश करना।

रोकथाम में चुनौतियां

  • यूजर-जनरेटेड कंटेंट की भारी मात्रा
  • नाबालिग संदिग्धों पर कानूनी गोपनीयता

माता-पिता क्या करें?

  •  सीमित स्क्रीन टाइम तय करें
  • पेरेंटल कंट्रोल और चैट फिल्टर सक्रिय रखें
  • बच्चों से नियमित संवाद बनाए रखें
  • संदिग्ध शब्द या कोड वर्ड पर सतर्क रहें

निष्कर्ष: डिजिटल दुनिया में बढ़ते खतरों के बीच अभिभावकों, स्कूलों और सरकार को मिलकर बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा सुनिश्चित करनी होगी। जागरूकता और संवाद ही सबसे बड़ा बचाव है।