फल, चावल और मूवी टिकट की मांग… हाई कोर्ट पहुंची नगर निगम कमिश्नर की व्हाट्सएप चैट
दुर्ग/ नगर निगम के आयुक्त और एक कर्मचारी के बीच हुए कथित निजी कामों से जुड़े वॉट्सएप चैट अब छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट तक पहुंच गए हैं।
कर्मचारी द्वारा दायर रिट याचिका में इन चैट्स की प्रतियां संलग्न की गई हैं, जिसने पूरे मामले को गंभीर बना दिया है।
याचिकाकर्ता का आरोप है कि जिस कर्मचारी से आयुक्त ने निजी कार्य कराए, उसी के खिलाफ बाद में अनुशासनात्मक कार्रवाई कर
उसे नौकरी से बाहर करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई।
कर्मचारी ने हाई कोर्ट में लगाई गुहार
पीड़ित कर्मचारी ने अधिवक्ता संदीप दुबे और मानस वाजपेयी के माध्यम से छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट में
रिट याचिका दायर कर नगर निगम आयुक्त की कार्रवाई पर रोक लगाने की मांग की है।
जस्टिस पी.पी. साहू की सिंगल बेंच में सुनवाई
मामले की सुनवाई हाई कोर्ट के जस्टिस पी.पी. साहू की एकल पीठ में हुई। याचिकाकर्ता की ओर से दलील दी गई कि
जांच प्रक्रिया में नियमों का पालन नहीं किया गया और किसी भी गवाह से विधिवत पूछताछ नहीं हुई।
अनुशासनात्मक कार्रवाई पर लगी रोक
कोर्ट ने प्रारंभिक सुनवाई के बाद याचिकाकर्ता के खिलाफ चल रही अनुशासनात्मक कार्रवाई पर अगली सुनवाई तक रोक लगा दी है।
अगली सुनवाई की तिथि 23 फरवरी तय की गई है।
निलंबन आदेश और आरोप पत्र को दी गई चुनौती
याचिकाकर्ता ने 18 सितंबर 2025 को जारी आरोप पत्र और 6 अक्टूबर 2026 की जांच रिपोर्ट को हाई कोर्ट में चुनौती दी है।
याचिका के अनुसार उसकी नियुक्ति 8 अगस्त 2014 को हुई थी और 21 नवंबर 2019 को उसे पदोन्नति मिली थी।
हाई कोर्ट में पेश हुई चर्चित व्हाट्सएप चैट
- लाल अंगूर लाने का निर्देश
- 10 किलो जायफूल चावल मंगाने की बात
- फिल्म “धुरंधर” के लिए कॉर्नर सीट का टिकट
- बंगले के वाई-फाई का रिचार्ज
- एक कर्मचारी को “समझा देने” का उल्लेख
- एमआईसी बैठक रद्द करने को लेकर चर्चा
मामले ने पकड़ा प्रशासनिक तूल
पूरे घटनाक्रम ने नगर निगम प्रशासन की कार्यशैली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। अब सभी की निगाहें हाई कोर्ट की अगली सुनवाई पर टिकी हैं।

