बस सत्ता का हमारे मन में इतना आदर है। यह स्वतंत्र आदमियों का लक्षण नहीं है। सारा अखबार सत्ताधिकारियों की आवाज से भरा है। उनकी ही खबरें..किसको छींक आ गई, किसको क्या तकलीफ हो गई, वे सारी खबरें हैं। किसके घर कौन आया, कौन गया, वे सब खबरें हैं। जैसे मुल्क में और कुछ भी नहीं होता। न मुल्क में संगीत है, न मुल्क में कला है, न मुल्क में धर्म है, न मुल्क में दर्शन है, न मुल्क में योग है, कुछ भी नहीं है, सिर्फ राजनीति है। यह गुलाम आदमियों का लक्षण है।