छत्तीसगढ़ में 18 नेताओं को मिला मंत्री स्तर का दर्जा, रामलाल चौहान, रूप सिंह मंडावी और डॉ. ममता साहू कैबिनेट मंत्री के समकक्ष
रायपुर। छत्तीसगढ़ सरकार ने विभिन्न मंडलों, आयोगों, बोर्डों और अन्य संस्थाओं में पदस्थ राजनीतिक नियुक्तियों को मंत्री स्तर का दर्जा देने का निर्णय लिया है। सामान्य प्रशासन विभाग की ओर से गुरुवार को जारी आदेश के अनुसार कुल 18 पदाधिकारियों को मंत्री स्तर की सुविधाएं और प्रोटोकॉल प्रदान किया गया है।
तीन प्रमुख चेहरों को कैबिनेट मंत्री का दर्जा
सरकार के आदेश में तीन अध्यक्षों को कैबिनेट मंत्री स्तर का दर्जा दिया गया है। इनमें राज्य अनुसूचित जाति आयोग के अध्यक्ष रामलाल चौहान, राज्य अनुसूचित जनजाति आयोग के अध्यक्ष रूप सिंह मंडावी और राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष डॉ. ममता साहू शामिल हैं।
रूप सिंह मंडावी के मामले में दर्जे में बदलाव किया गया है। उन्हें पहले राज्य मंत्री स्तर का दर्जा प्राप्त था, जिसे अब बढ़ाकर कैबिनेट मंत्री स्तर कर दिया गया है।
इन 15 पदाधिकारियों को राज्य मंत्री का दर्जा
सरकार ने विभिन्न विकास निगमों, बोर्डों, आयोगों और अकादमियों से जुड़े 15 अध्यक्षों एवं उपाध्यक्षों को राज्य मंत्री स्तर का दर्जा प्रदान किया है। इनमें प्रमुख रूप से—
- राज्य केश शिल्पी कल्याण बोर्ड के अध्यक्ष गौरीशंकर श्रीवास
- मछुआ कल्याण बोर्ड के अध्यक्ष आनंद निषाद
- संस्कृत विद्या मंडल के अध्यक्ष राजेश कुमार राजपूत
- शाकंभरी बोर्ड के अध्यक्ष राजेंद्र नायक
- राज्य शिक्षा आयोग के अध्यक्ष सुधीर गौतम
- राज्य हज कमेटी के अध्यक्ष एजाज मिर्जा बेग
- राज्य हथकरघा विकास एवं विपणन संघ के अध्यक्ष भोजराज देवांगन
- राज्य राजभाषा आयोग के अध्यक्ष प्रभात मिश्रा
- राज्य सिंधी अकादमी की अध्यक्ष सुषमा जेठानी
- राज्य सहकारी विपणन संघ के अध्यक्ष शशिकांत द्विवेदी
शामिल हैं।
उपाध्यक्षों को भी राज्य मंत्री का दर्जा
आदेश के अनुसार रायपुर विकास प्राधिकरण के उपाध्यक्ष डॉ. जेपी शर्मा, छत्तीसगढ़ श्रम कल्याण मंडल के उपाध्यक्ष किशोर महानंद, राज्य गौ सेवा आयोग के उपाध्यक्ष आनंद कुमार तिवारी (राजीव लोचन दास महाराज), राज्य अनुसूचित जाति आयोग के उपाध्यक्ष वेदराम मनहरे और राज्य अनुसूचित जनजाति आयोग के उपाध्यक्ष मंगल दास ठाकुर को भी राज्य मंत्री स्तर का दर्जा दिया गया है।
प्रशासनिक कामकाज के लिए जारी हुआ आदेश
सामान्य प्रशासन विभाग के सचिव अविनाश चंपावत की ओर से जारी आदेश में यह भी स्पष्ट किया गया है कि पदाधिकारियों को दिया गया यह दर्जा किसी प्रकार की वरिष्ठता अथवा आधिकारिक प्रोटोकॉल क्रम को प्रदर्शित नहीं करता। इसका उद्देश्य संबंधित संस्थाओं के कामकाज के दौरान आवश्यक प्रशासनिक एवं प्रोटोकॉल व्यवस्था उपलब्ध कराना है।
सरकार के इस फैसले को विभिन्न आयोगों, बोर्डों और निगमों में राजनीतिक नियुक्तियों को प्रशासनिक स्तर पर औपचारिक दर्जा देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।



