कुम्हारी की सड़कों पर मौत का साया: अज्ञात वाहन की ठोकर से दो बछड़ों की मौत, एक घायल
लावारिस मवेशियों के प्रबंधन में पालिका प्रशासन की कथित उदासीनता पर उठे सवाल, खाली पड़े गौठानों के बावजूद सड़कों पर मवेशियों का डेरा
राकेश सोनकर की रिपोर्ट | संवाददाता | कुम्हारी
कुम्हारी। कुम्हारी-परसदा मार्ग पर आधी रात के समय सड़क पर बैठे मवेशियों के झुंड को अज्ञात वाहन ने जोरदार टक्कर मार दी। हादसे में दो बछड़ों की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि एक मवेशी गंभीर रूप से घायल हो गया। घटना ने एक बार फिर नगर में सड़कों पर खुलेआम घूम रहे और बैठे रहने वाले लावारिस मवेशियों के प्रबंधन को लेकर नगर पालिका प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
सुबह घटना की जानकारी मिलने के बाद नगर पालिका प्रशासन की टीम मौके पर पहुंची और मृत मवेशियों के शवों को वहां से हटाया। घटना की जानकारी दैनिक पंजी में दर्ज किए जाने की बात भी सामने आई है। लेकिन सवाल यह है कि क्या हर हादसे के बाद सिर्फ शव उठाना ही पालिका प्रशासन की जिम्मेदारी है, या सड़क पर मवेशियों के जमावड़े को रोकने के लिए पहले से कोई ठोस व्यवस्था करना भी उसकी जिम्मेदारी है?
सड़कों पर बैठे मवेशी, हर पल हादसे का खतरा
कुम्हारी नगर के कई प्रमुख मार्गों पर दिन-रात मवेशियों के झुंड बैठे नजर आते हैं। रात के समय सड़क पर बैठे मवेशी वाहन चालकों को दूर से दिखाई नहीं देते, जिससे कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है। दो बछड़ों की मौत की यह घटना इसी खतरे का गंभीर उदाहरण है।
राहगीरों का कहना है कि सड़क पर मवेशियों का जमावड़ा अब सामान्य दृश्य बन चुका है। वाहन चालकों को मवेशियों से बचकर निकलना पड़ता है। कई बार अचानक मवेशियों के सड़क पर दौड़ पड़ने से दुर्घटना की स्थिति बन जाती है। इसके बावजूद समस्या के स्थायी समाधान की दिशा में प्रभावी कार्रवाई नजर नहीं आती।
व्यापारी भी परेशान, दुकानों के सामने मवेशियों का डेरा
लावारिस मवेशियों की समस्या सिर्फ यातायात तक सीमित नहीं है। नगर के व्यावसायिक क्षेत्रों में दुकानों और प्रतिष्ठानों के सामने भी मवेशियों का जमावड़ा लगा रहता है। मवेशियों द्वारा जगह-जगह गोबर किए जाने से व्यापारियों और आम नागरिकों को परेशानी का सामना करना पड़ता है। इससे स्वच्छता व्यवस्था पर भी सवाल उठते हैं।
पांच गांवों में बने गौठान, फिर भी सड़कों पर मवेशी क्यों?
सबसे बड़ा सवाल यह है कि नगर पालिका क्षेत्र में आने वाले परसदा, जंजगिरी, कुगदा, रामपुर और कुम्हारी सहित पांच गांवों में पूर्ववर्ती कांग्रेस शासनकाल में गौठान बनाए गए थे। वर्तमान में योजना बंद होने के कारण इन गौठानों का उपयोग मवेशियों को रखने के लिए नहीं किया जा रहा है।
ऐसे में सवाल उठना स्वाभाविक है कि जब नगर क्षेत्र में पहले से ही मवेशियों के लिए स्थान उपलब्ध हैं, तो फिर सड़कें ही मवेशियों के बैठने और घूमने की जगह क्यों बनी हुई हैं?
प्रशासन कार्रवाई कब करेगा या अगली दुर्घटना का इंतजार?
दो बछड़ों की मौत की घटना के बाद नगरवासियों में नाराजगी है। लोगों का कहना है कि पालिका प्रशासन को केवल दुर्घटना के बाद मृत मवेशियों को हटाने तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि सड़कों पर मवेशियों के जमावड़े को रोकने के लिए स्थायी और प्रभावी व्यवस्था करनी चाहिए।
नगरवासियों ने मांग की है कि लावारिस मवेशियों को सुरक्षित स्थान पर रखने, पशु मालिकों की पहचान कर जिम्मेदारी तय करने और प्रमुख मार्गों पर मवेशियों के जमावड़े को रोकने के लिए तत्काल अभियान चलाया जाए।
अब देखने वाली बात यह है कि दो बछड़ों की मौत के बाद पालिका प्रशासन इस समस्या को गंभीरता से लेकर कोई ठोस कदम उठाता है या फिर यह घटना भी दैनिक पंजी में दर्ज होकर फाइलों में दफन हो जाएगी।

