चरौदा-दादर रोड की बदहाली पर फूटा जनाक्रोश, पार्षद टेलेंद्र ठाकरे कल से अनिश्चितकालीन अनशन पर बैठेंगे, “बार-बार शिकायत के बावजूद नहीं बनी सड़क, हादसों से त्रस्त जनता के लिए संघर्ष का ऐलान”

 चरौदा-दादर रोड की बदहाली पर फूटा जनाक्रोश, पार्षद टेलेंद्र ठाकरे कल से अनिश्चितकालीन अनशन पर बैठेंगे, “बार-बार शिकायत के बावजूद नहीं बनी सड़क, हादसों से त्रस्त जनता के लिए संघर्ष का ऐलान”

भिलाई-चरौदा। नगर निगम भिलाई-चरौदा के वार्ड क्रमांक-23 अंतर्गत चरौदा बस स्टैंड से दादर तक जाने वाली सड़क की जर्जर स्थिति को लेकर अब जनप्रतिनिधियों का आंदोलन तेज हो गया है। वार्ड पार्षद टेलेंद्र ठाकरे ने घोषणा की है कि यदि वर्षों से बदहाल इस मार्ग के निर्माण को लेकर प्रशासन ठोस आश्वासन नहीं देता, तो वे 07 अगस्त 2026 सुबह 9 बजे से शांतिपूर्ण अनशन शुरू करेंगे। उन्होंने स्पष्ट किया है कि निर्धारित अवधि तक समाधान नहीं मिलने की स्थिति में आंदोलन आगे भी जारी रहेगा।

महापौर कक्ष में हुई उच्चस्तरीय बैठक बेनतीजा, अधिकारियों ने फिर दिया आश्वासन; पार्षद बोले— अब वादों पर नहीं, काम पर होगा भरोसा

अनशन की घोषणा से पहले इस गंभीर मामले को लेकर नगर निगम भिलाई-चरौदा के महापौर कक्ष में एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। बैठक में एसडीएम, महापौर, सभापति, रेलवे के अधिकारी, नगर निगम के अधिकारी, बड़ी संख्या में वार्डवासी एवं जनप्रतिनिधि मौजूद रहे। बैठक के दौरान सड़क की बदहाल स्थिति पर विस्तार से चर्चा हुई।

बैठक में अधिकारियों ने जल्द से जल्द समस्या के समाधान और सड़क निर्माण की प्रक्रिया आगे बढ़ाने का आश्वासन दिया। हालांकि क्षेत्रवासियों का कहना है कि ऐसे आश्वासन पहले भी कई बार मिल चुके हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर आज तक कोई ठोस काम दिखाई नहीं दिया।

“अब आश्वासन नहीं, काम का प्रमाण चाहिए”

बैठक के बाद पार्षद टेलेंद्र ठाकरे ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि जनता अब केवल वादे और आश्वासन सुनने की स्थिति में नहीं है। उन्होंने कहा कि सड़क निर्माण को लेकर वर्षों से सिर्फ बैठकों का दौर चलता रहा, लेकिन सड़क की हालत लगातार बदतर होती गई।

उन्होंने कहा कि उनका अनशन किसी राजनीतिक लाभ के लिए नहीं, बल्कि आम जनता को इस गंभीर समस्या से राहत दिलाने के उद्देश्य से है। यदि निर्धारित समय में सड़क निर्माण को लेकर ठोस कार्रवाई शुरू नहीं होती, तो आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जाएगा।

रोज हादसों का खतरा, जिम्मेदार विभागों पर उठ रहे सवाल

चरौदा-दादर मार्ग पर जगह-जगह बड़े गड्ढे, जलभराव और उखड़ी हुई सड़क लोगों के लिए मुसीबत बन गई है। स्कूली बच्चों, कर्मचारियों, व्यापारियों और एम्बुलेंस तक को इस मार्ग से गुजरने में भारी परेशानी का सामना करना पड़ता है। बरसात में स्थिति और भी भयावह हो जाती है तथा दुर्घटनाओं का खतरा कई गुना बढ़ जाता है।

स्थानीय लोगों का आरोप है कि नगर निगम और रेलवे विभाग के बीच जिम्मेदारी तय नहीं होने का खामियाजा आम जनता वर्षों से भुगत रही है।

अनशन की चेतावनी, उग्र आंदोलन के संकेत

पार्षद टेलेंद्र ठाकरे ने प्रशासन को स्पष्ट संदेश देते हुए कहा कि यदि इस बार भी केवल आश्वासन देकर मामला टालने का प्रयास किया गया, तो शांतिपूर्ण अनशन के बाद जनभागीदारी के साथ बड़ा आंदोलन किया जाएगा। उन्होंने कहा कि क्षेत्र की जनता अब अपने अधिकार के लिए निर्णायक लड़ाई लड़ने को तैयार है और सड़क निर्माण होने तक संघर्ष जारी रहेगा।

अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या इस बार प्रशासन सिर्फ आश्वासन देगा या चरौदा-दादर सड़क की बदहाली वास्तव में खत्म होगी?

स्थानीय लोगों का कहना है कि चरौदा बस स्टैंड से दादर तक का यह मार्ग लंबे समय से गड्ढों में तब्दील हो चुका है। सड़क की हालत इतनी खराब है कि प्रतिदिन वाहन चालक, स्कूली बच्चे, बुजुर्ग और आम नागरिक जोखिम उठाकर आवागमन करने को मजबूर हैं। बरसात के दौरान स्थिति और भी गंभीर हो जाती है, जिससे दुर्घटनाओं की आशंका लगातार बनी रहती है।

पार्षद टेलेंद्र ठाकरे ने आरोप लगाया कि सड़क निर्माण की मांग को लेकर कई बार नगर निगम प्रशासन और रेलवे विभाग के समक्ष मामला उठाया गया, लेकिन आज तक केवल आश्वासन ही मिले। धरातल पर कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं होने से लोगों में भारी नाराजगी है।

उन्होंने कहा कि यह आंदोलन किसी राजनीतिक लाभ के लिए नहीं, बल्कि क्षेत्र की जनता के हित और उनकी सुरक्षा के लिए किया जा रहा है। यदि प्रशासन अब भी गंभीरता नहीं दिखाता, तो आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जाएगा, जिसकी पूरी जिम्मेदारी संबंधित विभागों की होगी।

इधर, इस मुद्दे को लेकर नगर निगम की राजनीति भी गरमा गई है। महापौर और सभापति ने भाजपा पर गंभीर आरोप लगाए हैं, जबकि विपक्ष भी सड़क निर्माण में हो रही देरी को लेकर निगम प्रशासन को घेर रहा है। सड़क की बदहाली अब आम जनता के साथ-साथ राजनीतिक बहस का भी बड़ा विषय बन गई है।

पार्षद द्वारा इस संबंध में मंडल रेल प्रबंधक रायपुर, नगर निगम आयुक्त, थाना पुरानी भिलाई तथा जीआरपी चरौदा को भी लिखित सूचना भेजी गई है, ताकि प्रस्तावित अनशन के दौरान कानून-व्यवस्था और आवश्यक प्रशासनिक व्यवस्थाएं सुनिश्चित की जा सकें।

अब क्षेत्रवासियों की निगाहें प्रशासन पर टिकी हैं। सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या अनशन शुरू होने से पहले जिम्मेदार विभाग सड़क निर्माण को लेकर कोई ठोस निर्णय लेगा, या फिर जनता को अपने जनप्रतिनिधि के साथ आंदोलन की राह पर उतरना पड़ेगा?