बालमुनि हंसभद्रजी ने शतावधान से चौंकाया: 2 मिनट 38 सेकंड में सुनाए 100 शब्द, विद्यार्थियों ने देखा अद्भुत स्मरण कौशल

 बालमुनि हंसभद्रजी ने शतावधान से चौंकाया: 2 मिनट 38 सेकंड में सुनाए 100 शब्द, विद्यार्थियों ने देखा अद्भुत स्मरण कौशल

कुम्हारी। विचक्षण जैन विद्यापीठ के प्रज्ञायतन हॉल में आयोजित शतावधान का विलक्षण एवं प्रेरणादायी प्रदर्शन विद्यार्थियों, अभिभावकों और उपस्थित अतिथियों के लिए अविस्मरणीय बन गया। बालमुनि हंसभद्रजी ने अपनी अद्भुत स्मरण शक्ति, एकाग्रता और आत्मबल का ऐसा परिचय दिया कि पूरा सभागार तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा।कार्यक्रम में परमपूज्य आचार्य श्री जिनचंद्रसुरिश्वरजी महाराज, भीष्म तपस्वी विराग मुनिजी महाराज, नेपाल केसरी मणिभद्रसूरिजी, निपुणा मंडल की साध्वीवृंद, विचक्षण जैन विद्यापीठ ट्रस्ट के पदाधिकारी, अभिभावक एवं बड़ी संख्या में विद्यार्थी उपस्थित रहे।

ज्ञान, साधना और आत्मशक्ति का जीवंत उदाहरण

कार्यक्रम की शुरुआत में संस्था के अध्यक्ष राजेश सावनसुखा ने गुरु भगवंतों के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करते हुए अतिथियों का स्वागत किया और विद्यापीठ की गतिविधियों एवं उद्देश्यों की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि कठोर तप, साधना और आत्मानुशासन के माध्यम से विकसित होने वाली ऐसी विलक्षण स्मरण क्षमता अत्यंत दुर्लभ है।उन्होंने कहा कि शतावधान कोई चमत्कार नहीं, बल्कि जैन परंपरा में ज्ञान, ध्यान और आत्मशक्ति के विकास का सजीव प्रयोग है। प्रत्येक व्यक्ति के भीतर असीम संभावनाएँ होती हैं, जिन्हें अनुशासन, साधना और निरंतर अभ्यास से विकसित किया जा सकता है।

100 शब्द… सिर्फ 2 मिनट 38 सेकंड में किए याद

प्रख्यात वक्ता महेन्द्र मुकीम के प्रभावी संचालन में आयोजित इस विशेष प्रयोग के दौरान विद्यार्थियों ने 20 अलग-अलग श्रेणियों में पाँच-पाँच नाम अथवा वस्तुएँ बताईं, जिससे कुल 100 शब्दों का संकलन तैयार हुआ।

इसके बाद बालमुनि हंसभद्रजी ने मात्र 2 मिनट 38 सेकंड में सभी 100 शब्दों को क्रमवार सुनाकर सभी को आश्चर्यचकित कर दिया। इतना ही नहीं, उन्होंने समान सहजता से सभी शब्द उल्टे क्रम में भी दोहराए तथा बीच में किसी भी क्रमांक का शब्द पूछे जाने पर तत्काल और सटीक उत्तर देकर अपनी अद्भुत स्मरण क्षमता का परिचय दिया।

विद्यार्थियों को मिला एकाग्रता और अनुशासन का संदेश

बालमुनि हंसभद्रजी के इस अद्भुत प्रदर्शन ने विद्यार्थियों को यह प्रेरणा दी कि नियमित अभ्यास, आत्मअनुशासन और एकाग्रता के माध्यम से स्मरण शक्ति एवं मानसिक क्षमता का असाधारण विकास किया जा सकता है।

इस अवसर पर विराग मुनिजी महाराज ने विद्यार्थियों को अवधान की अवधारणा, मस्तिष्क को केंद्रित करने की विधि तथा उसके व्यावहारिक प्रयोग के बारे में विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने बच्चों को स्मरण शक्ति बढ़ाने और अध्ययन में एकाग्रता विकसित करने के अनेक उपयोगी सूत्र भी बताए।

इनकी रही गरिमामयी उपस्थिति

कार्यक्रम में विद्यापीठ ट्रस्ट के संपत्त झाबक, विजयमालु, सुनील गोलछा, नरेश बूरड़, श्रीमती सुनीता लूनिया, कोर कमेटी के सदस्य, प्राचार्य ए.पी. सिंह, शिक्षकगण, अभिभावक एवं बड़ी संख्या में विद्यार्थी उपस्थित रहे।

कार्यक्रम के समापन पर उपस्थित सभी लोगों ने बालमुनि हंसभद्रजी के विलक्षण प्रदर्शन की मुक्तकंठ से सराहना करते हुए इसे विद्यार्थियों के लिए अत्यंत प्रेरणादायी, ज्ञानवर्धक और जीवनोपयोगी अनुभव बताया। यह आयोजन केवल स्मरण शक्ति का प्रदर्शन नहीं, बल्कि साधना, अनुशासन और आत्मविश्वास के माध्यम से मानव क्षमता के सर्वोच्च विकास का प्रेरक संदेश भी बनकर सामने आया।