महादेव बेटिंग नेटवर्क पर शिकंजा: ओमान में हिरासत में लिया गया सौरभ चंद्राकर, भारत प्रत्यर्पण की प्रक्रिया तेज
रायपुर। देश के चर्चित महादेव ऑनलाइन बेटिंग नेटवर्क से जुड़े बड़े घटनाक्रम में कथित मास्टरमाइंड सौरभ चंद्राकर को ओमान में हिरासत में लिए जाने की जानकारी सामने आई है। केंद्रीय जांच एजेंसियों से जुड़े सूत्रों के अनुसार, इंटरपोल की सूचना के आधार पर ओमान की रॉयल पुलिस ने कार्रवाई की है। अब भारतीय एजेंसियां उसे भारत लाने के लिए प्रत्यर्पण प्रक्रिया को आगे बढ़ा रही हैं।
भारत वापसी की तैयारी
सूत्रों का कहना है कि भारत और ओमान के बीच मौजूद प्रत्यर्पण संधि के चलते जांच एजेंसियों को उम्मीद है कि कानूनी प्रक्रिया पूरी होने के बाद सौरभ चंद्राकर को भारत लाया जा सकेगा। हालांकि, इस संबंध में संबंधित देशों की एजेंसियों की ओर से आधिकारिक पुष्टि का इंतजार किया जा रहा है।
फर्जी दस्तावेजों के इस्तेमाल की आशंका
जांच से जुड़े सूत्रों के मुताबिक, चंद्राकर की हालिया गतिविधियां पहले संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) से जुड़ी बताई गई थीं। प्रारंभिक जानकारी में यह आशंका भी जताई जा रही है कि उसने किसी दक्षिण-पूर्व एशियाई देश से प्राप्त कथित फर्जी पासपोर्ट का उपयोग कर ओमान में प्रवेश किया हो। एजेंसियां इस पहलू की भी जांच कर रही हैं।
दुबई से संचालित होता था नेटवर्क
जांच एजेंसियों के अनुसार, सौरभ चंद्राकर और उसके सहयोगी रवि उप्पल ने दुबई से एक बड़े ऑनलाइन बेटिंग नेटवर्क का संचालन किया। आरोप है कि इस प्लेटफॉर्म के माध्यम से क्रिकेट, फुटबॉल, टेनिस, बैडमिंटन, पोकर, कार्ड गेम्स और अन्य आयोजनों पर अवैध सट्टेबाजी कराई जाती थी।
बताया जाता है कि वर्ष 2019 के बाद से दोनों प्रमुख आरोपियों की गतिविधियां विदेशों से संचालित हो रही थीं और भारतीय एजेंसियां लगातार उनकी तलाश में जुटी थीं।
पहले भी हुई थी हिरासत की कार्रवाई
इससे पहले वर्ष 2024 में भी इंटरपोल रेड नोटिस के आधार पर यूएई में सौरभ चंद्राकर को हिरासत में लिया गया था। उस दौरान भारत की ओर से प्रत्यर्पण का अनुरोध भेजा गया था, लेकिन कानूनी प्रक्रिया पूरी नहीं हो सकी थी। बाद में उसे रिहा कर दिया गया था। इसी दौरान उसके सहयोगी रवि उप्पल के भी यूएई से निकल जाने की खबरें सामने आई थीं।
कई एजेंसियां कर रही हैं जांच
महादेव बेटिंग ऐप मामले की जांच वर्तमान में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी), केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई), राज्य पुलिस और अन्य जांच एजेंसियों द्वारा की जा रही है। एजेंसियों का दावा है कि यह देश के सबसे बड़े ऑनलाइन सट्टेबाजी नेटवर्क में से एक रहा है, जिसके जरिए बड़े पैमाने पर अवैध वित्तीय लेन-देन किए गए।
हजारों कर्मचारियों और सैकड़ों पैनलों का दावा
ईडी द्वारा अदालत में प्रस्तुत दस्तावेजों और जांच रिपोर्टों में दावा किया गया है कि नेटवर्क देशभर में हजारों ऑनलाइन बेटिंग पैनलों के माध्यम से संचालित होता था। जांच में यह भी उल्लेख किया गया है कि दुबई में संचालन के लिए कई विला किराये पर लिए गए थे और हजारों लोगों को विभिन्न तकनीकी व संचालन संबंधी कार्यों में लगाया गया था।
राजनीतिक और प्रशासनिक कनेक्शन भी जांच के घेरे में
इस बहुचर्चित मामले में कई कारोबारी, पुलिस अधिकारी, नौकरशाह और राजनीतिक व्यक्तियों के नाम भी जांच के दौरान सामने आए हैं। जांच एजेंसियों ने छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री Bhupesh Baghel का नाम भी अपने दस्तावेजों में शामिल किया है। हालांकि, मामले से जुड़े आरोपों पर अंतिम निर्णय न्यायालय में लंबित है और सभी पक्षों को कानून के तहत अपना पक्ष रखने का अधिकार प्राप्त है।
आगे क्या?
सौरभ चंद्राकर के ओमान में हिरासत में होने की खबर के बाद अब नजरें भारत की प्रत्यर्पण प्रक्रिया पर टिकी हैं। यदि कानूनी औपचारिकताएं समय पर पूरी होती हैं, तो महादेव बेटिंग मामले की जांच में एक बड़ा मोड़ आ सकता है और एजेंसियों को कई अहम जानकारियां मिलने की संभावना है।

