पंडवानी की अमर स्वर साधिका तीजन बाई को अंतिम विदाई, भूपेश बघेल समेत हजारों लोगों ने दी भावभीनी श्रद्धांजलि
दुर्ग/रायपुर। छत्तीसगढ़ की सुप्रसिद्ध पंडवानी गायिका एवं लोककला की वैश्विक पहचान रही पद्म विभूषण सम्मानित तीजन बाई को रविवार, 5 जुलाई 2026 को पूरे राजकीय सम्मान और भावभीनी श्रद्धांजलि के साथ अंतिम विदाई दी गई। उनके अंतिम संस्कार में प्रदेश के राजनीतिक, सामाजिक एवं सांस्कृतिक क्षेत्र की अनेक हस्तियां शामिल हुईं।
पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने अंतिम संस्कार में पहुंचकर तीजन बाई को श्रद्धासुमन अर्पित किए और उनके निधन को छत्तीसगढ़ की लोक संस्कृति के लिए अपूरणीय क्षति बताया। इस अवसर पर छत्तीसगढ़ शासन के मंत्रीगण, विधायक, जनप्रतिनिधि तथा विभिन्न राजनीतिक दलों के पदाधिकारी और कार्यकर्ता भी उपस्थित रहे।
दुर्ग ग्रामीण कांग्रेस कमेटी के जिला महामंत्री एवं पाटन विधानसभा प्रभारी राम सूर्यवंशी ने भी अंतिम संस्कार में शामिल होकर तीजन बाई को श्रद्धांजलि अर्पित की। उनके साथ कांग्रेस के वरिष्ठ पदाधिकारी एवं बड़ी संख्या में कांग्रेस कार्यकर्ता मौजूद रहे।
श्रद्धांजलि सभा में वक्ताओं ने कहा कि तीजन बाई ने अपनी अद्भुत कला, सशक्त प्रस्तुति और समर्पण के बल पर पंडवानी गायन को देश-विदेश में नई पहचान दिलाई। उन्होंने छत्तीसगढ़ की लोक परंपराओं और सांस्कृतिक विरासत को विश्व मंच तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया।
अंतिम विदाई के दौरान बड़ी संख्या में कला प्रेमी, सामाजिक कार्यकर्ता एवं आमजन उपस्थित रहे। सभी ने नम आंखों से लोककला की इस महान साधिका को अंतिम प्रणाम किया और उनके द्वारा छत्तीसगढ़ की संस्कृति को दिए गए अमूल्य योगदान को याद किया।
तीजन बाई का जीवन आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बना रहेगा। उनकी कला, संघर्ष और उपलब्धियां सदैव छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक धरोहर के रूप में याद की जाएंगी।

