उत्तर प्रदेश गाजीपुर जिले के कटरिया-बाराचवर में स्वास्थ्य योजनाओं पर अफसरशाही का ताला! करोड़ों की इमारतें खड़ी, इलाज के लिए आज भी भटक रहे ग्रामीण

 उत्तर प्रदेश गाजीपुर जिले के कटरिया-बाराचवर में स्वास्थ्य योजनाओं पर अफसरशाही का ताला! करोड़ों की इमारतें खड़ी, इलाज के लिए आज भी भटक रहे ग्रामीण

योगी सरकार की मंशा पर अधिकारियों की लापरवाही भारी, तीन साल से बंद पड़ा आरोग्य केंद्र, दो साल से वीरान सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र

गाजीपुर (उत्तर प्रदेश)। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ प्रदेश के ग्रामीण क्षेत्रों तक बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं पहुंचाने के लिए लगातार नई योजनाएं लागू कर रहे हैं। आयुष्मान भारत योजना के अंतर्गत हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र और प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार पर सरकार करोड़ों रुपये खर्च कर रही है। लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि कई स्थानों पर अधिकारियों और जिम्मेदार विभागों की उदासीनता सरकार की मंशा पर पानी फेर रही है।

ऐसा ही मामला गाजीपुर जिले के बाराचवर विकासखंड के कटरिया गांव से सामने आया है, जहां स्वास्थ्य सुविधाओं के नाम पर बनाई गई सरकारी इमारतें आज शोपीस बनकर रह गई हैं।

ग्रामीणों के अनुसार आयुष्मान भारत योजना के अंतर्गत आरोग्य स्वास्थ्य केंद्र का निर्माण लगभग तीन वर्ष पहले पूरा हो चुका था, लेकिन आज तक इसका संचालन शुरू नहीं हो पाया है। लाखों रुपये खर्च कर बनाई गई यह इमारत वर्षों से बंद पड़ी है। भवन की दीवारें जर्जर होने लगी हैं और परिसर में अव्यवस्था का माहौल दिखाई देता है।

स्थिति यहीं तक सीमित नहीं है। आरोग्य स्वास्थ्य केंद्र के ठीक सामने प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र भवन का निर्माण भी लगभग दो वर्ष पहले पूरा हो चुका है, लेकिन आज तक यह आम जनता के लिए शुरू नहीं किया गया। हालत यह है कि भवन में कई स्थानों पर दरवाजे और खिड़कियां तक नहीं लगी हैं। रखरखाव के अभाव में भवन धीरे-धीरे खंडहर में तब्दील होता नजर आ रहा है।

सरकार ने भवन दिए, अधिकारियों ने सेवा नहीं दी

सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब निर्माण कार्य पूरा हो चुका है तो आखिर इन भवनों का संचालन क्यों नहीं शुरू किया गया? यदि स्वास्थ्य विभाग और संबंधित अधिकारियों ने समय पर कार्रवाई की होती तो आसपास के हजारों ग्रामीणों को बेहतर चिकित्सा सुविधाएं मिल सकती थीं।

ग्रामीणों का कहना है कि बीमार होने पर आज भी उन्हें कई किलोमीटर दूर अन्य स्वास्थ्य केंद्रों या जिला मुख्यालय का रुख करना पड़ता है। आपातकालीन परिस्थितियों में यह समस्या और गंभीर हो जाती है।

जांच हुई तो खुल सकते हैं कई राज

स्थानीय लोगों का आरोप है कि योजनाओं के निर्माण में सरकारी धन खर्च कर दिया गया, लेकिन संचालन और व्यवस्थाओं की जिम्मेदारी निभाने में संबंधित अधिकारी पूरी तरह विफल रहे। यदि उच्चस्तरीय जांच कराई जाए तो यह स्पष्ट हो सकता है कि आखिर किन कारणों से वर्षों से तैयार भवन जनता को समर्पित नहीं किए गए।

मुख्यमंत्री से ग्रामीणों की उम्मीद

ग्रामीणों का कहना है कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ लगातार सरकारी योजनाओं की मॉनिटरिंग और समीक्षा कर रहे हैं। ऐसे में कटरिया गांव की यह तस्वीर संबंधित विभागों की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े करती है। लोगों ने मांग की है कि मामले की जांच कर जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की जाए और दोनों स्वास्थ्य केंद्रों का संचालन तत्काल शुरू कराया जाए।

स्वास्थ्य सेवाओं के लिए बनाई गई इमारतें यदि वर्षों तक ताले में बंद रहें तो यह केवल सरकारी संसाधनों की बर्बादी नहीं, बल्कि ग्रामीण जनता के अधिकारों के साथ भी अन्याय है। अब देखना होगा कि प्रशासन इस गंभीर मामले पर कब तक कार्रवाई करता है और कब तक कटारिया के लोगों को उनके हिस्से की स्वास्थ्य सुविधा मिल पाती है।